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सोरेन की नियुक्ति को अदालत में चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने के राज्यपाल के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मुंडा ने सोमवार को राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका दायर की. याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी. मुंडा ने अपनी याचिका में कहा है कि सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का राज्यपाल का फैसला असंवैधानिक है. झारखंड में पिछले महीने हुए चुनाव के बाद ही राजनीतिक सरगर्मी जारी है. किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और बहुमत कुछेक विधायकों के समर्थन पर निर्भर कर रहा था. ऐसे में राज्यपाल ने कांग्रेस और झामुमो गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया. राज्यपाल का यह फ़ैसला इतना विवादित रहा कि राष्ट्रपति ने झारखंड के राज्यपाल को दिल्ली तलब कर विचार विमर्श किया था. राज्यपाल ने सोरेन को अपना बहुमत साबित करने के लिए 15 मार्च तक का समय दिया है. हालांकि अब राज्य में प्रोटेम स्पीकर को लेकर भी विवाद हो रहा है.
स्पीकर पर विवाद राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने शिबू सोरेन सरकार से कहा है कि वे प्रोटेम स्पीकर के नाम पर एक बार फिर विचार करें. सरकार की ओर से शनिवार को कांग्रेस विधायक प्रदीप कुमार बालमाचू का नाम प्रोटेम स्पीकर या अस्थाई विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए दिया गया था. नवनिर्वाचित विधानसभा का पहला सत्र 10 मार्च से बुलाया गया है जो 15 मार्च तक चलेगा. इसी सत्र में शिबू सोरेन को अपनी सरकार का बहुमत साबित करना है और इसी सत्र में नए सदस्यों को शपथ दिलाई जानी है. प्रोटेम स्पीकर ही सदस्यों को शपथ दिलवाएँगे और विश्वास मत पर चर्चा के बाद मतदान करवाएँगे. समझा जाता है कि राजभवन ने परंपराओं के हवाले से प्रोटेम स्पीकर के नाम पर आपत्ति जताई है. परंपरा के अनुसार सदन के वरिष्ठतम सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है. विश्लेषक मानते हैं कि शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के बाद विवाद में आए राज्यपाल सिब्ते रज़ी अब हर कदम फूँक-फूँक कर रख रहे हैं और वे अब विवाद का कोई मौक़ा नहीं देना चाहते. |
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