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पहले दौर के लिए प्रचार कार्य समाप्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के तीन राज्यों में हो रहे विधान सभा चुनाव के पहले दौर के लिए प्रचार कार्य मंगलवार को समाप्त हो गया. बिहार, झारखंड और हरियाणा विधान सभा चुनाव के लिए पहले दौर का मतदान तीन फ़रवरी को होगा. चुनाव के मौक़े पर तीनों राज्यों में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं, ख़ासतौर से बिहार और झारखंड में नक्सल समस्या को देखते हुए क़ानून और व्यवस्था की कुछ चुनौतियाँ हैं. बिहार विधान सभा की कुल 243 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होगा जिसके लिए कुल 826 उम्मीदवार मैदान में हैं. पहले चरण का मतदान तीन फ़रवरी को, दूसरे दौर का 15 फ़रवरी को और तीसरे चरण का मतदान 23 फ़रवरी को होगा. झारखंड को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिलने के बाद वहाँ पहली बार विधान सभा चुनाव हो रहे हैं. 81 विधान सभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है जिनके लिए 402 उम्मीदवार मैदान में हैं. झारखंड में भी बिहार के साथ ही तीन फ़रवरी, 15 फ़रवरी और 23 फ़रवरी को तीन चरणों में मतदान होगा. हरियाणा विधान सभा की 90 सीटों के लिए मतदान सिर्फ़ एक ही चरण में तीन फ़रवरी को होगा जिनके लिए 983 उम्मीदवार मैदान में हैं.
इन सभी राज्यों मतगणना 27 फ़रवरी को होगी और चुनाव प्रक्रिया पाँच मार्च तक पूरी की जानी है. बिहार और झारखंड में नक्सलवादियों ने चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की है और कहा है कि बहिष्कार को कारगर बनाने के लिए वे छापामार लड़ाई को भी बढ़ावा देंगे. बिहार और झारखंड में हिंसा की आशंका के मद्देनज़र मतदान के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं. महत्वपूर्ण इन तीनों ही राज्यों के चुनाव देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और इन राज्यों से आने वाले नतीजों के दूरगामी राजनीतिक परिणाम होंगे. बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की सरकार चौथी बार सत्ता में लौटने के लिए जनादेश मांगेगी. मुख्यमंत्री के रुप में राबड़ी देवी के लिए ये दूसरे चुनाव होंगे. राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इस समय केंद्र में मंत्री हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए की हार से वे उत्साहित हैं. लेकिन दूसरी ओर लालू प्रसाद यादव के गठबंधन के साथी रामविलास पासवान के साथ उनके संबंधों में जिस तरह खटास आई है उससे एनडीए भी नए समीकरणों की उम्मीद कर रहा है. झारखंड को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिलने के बाद वहाँ विधान सभा चुनाव पहली बार हो रहा हैं. अभी वहाँ भाजपा की सरकार है और लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन की जिस तरह हार हुई है उसे राजनीतिक विश्लेषक राज्य सरकार की ख़राब छवि के परिणाम के रुप में देखते हैं. इसी तरह हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल की सरकार है और ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री हैं. बंसीलाल की पार्टी के कांग्रेस में विलय होने के बाद से हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस बहुत उत्साहित दिखती है. |
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