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श्रीलंका में फिलहाल गोद लेने पर पाबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने सूनामी लहरों की तबाही से प्रभावित बच्चों का शोषण होने की ख़बरें के बीच बच्चों के गोद लेने पर फिलहाल पाबंदी लगा दी है. संयुक्त राष्ट्र की बच्चों से जुड़ी संस्था यूनिसेफ़ ने इसी सप्ताह आशंका व्यक्त की थी कि कुछ आपराधिक गुट सूनामी लहरों से प्रभावित बच्चों को निशाना बना रहे हैं. श्रीलंका में इस बारे में जानकारी नहीं है कि इस तबाही से कितने बच्चे अनाथ और बेघर हुए हैं. सरकार ने कहा है कि वह ऐसे बच्चों की संख्या का पता लगाने के लिए जनगणना करा रही है. श्रीलंका सरकार ने कहा है कि सूनामी लहरों की तबाही में अब तक 30 हज़ार, 615 लोग मारे जा चुके हैं. उनके अलावा चार हज़ार और 356 अब भी लापता हैं. श्रीलंका के सरकारी प्रवक्ता मंगल समरवीरा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया, "अगले आदेशों तक बच्चों को गोद लेना ग़ैरक़ानून क़रार दे दिया गया है." "यहाँ तक कि कोई श्रीलंकाई व्यक्ति भी किसी बच्चे को फिलहाल गोद नहीं ले सकता जब तक कि सरकार इस बारे में किसी नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं करती है." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस तरह सरकार ने यह प्रावधान कर दिया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे को गोद लेता है तो उसे पहले अनिवार्य तौर पर सरकार की अनुमति लेनी होगी. सूनामी लहरों की तबाही में हज़ारों बच्चे प्रभावित हुए हैं और यूनिसेफ़ ने कहा था कि कुल मृतकों में एक तिहाई से ज़्यादा तो बच्चे ही हैं. आशंका व्यक्त की जा रही है प्रभावितों में से कुछ का तो अपहरण कर लिया गया है. श्रीलंका के प्रधानमंत्री के सचिव ललित वीरतुंगा ने पत्रकारों से कहा कि ऐसी कुछ घटनाओं की रिपोर्ट लिखाई गई हैं. उन्होंने कहा, "अगर आप अख़बार देखें तो इस तरह के बहुत से विज्ञापन छपे हैं जिनमें ऐसे बच्चों की वापसी की गुज़ारिश की गई है जिन्हें (गवाहों को मुताबिक़) छीन लिया गया." उन्होंने बताया कि कम से कम नौ हज़ार बच्चे श्रीलंका में सूनामी लहरों से प्रभावित हुए हैं. उधर बाल अधिकारों से जुड़े साठ से भी ज़्यादा संगठनों ने भारत में भी आहवान किया है कि सूनामी लहरों से प्रभावित बच्चों को गोद लेने पर पाबंदी लगाई जाए. संगठनों का कहना है कि ऐसा करने से बच्चों की तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. |
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