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पॉवेल जायज़ा लेने श्रीलंका पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल सूनामी लहरों से हुई तबाही का जायज़ा लेने के लिए श्रीलंका का दौरा कर रहे हैं. शुक्रवार को ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान भी श्रीलंका पहुँच रहे हैं. ग़ौरतलब है कि श्रीलंका में इस बात पर विवाद खड़ा हो गया है कि क्या सरकार ने एलटीटीई के नियंत्रण वाले इलाक़े में भरपूर सहायता सामग्री पहुँचाई जा रही या नहीं. एलटीटीई का आरोप है कि सरकार की तरफ से उन्हें बहुत कम सहायता मिल पाई है. लेकिन सरकार का कहना है कि देश के दक्षिणी इलाक़े की तुलना में सहायता तमिल बहुत पश्चिमोत्तर इलाक़े में दी गई है. कोफ़ी अन्नान और पॉवेल अलग-अलग श्रीलंका कर रहे हैं, हालाँकि दोनों ही हस्तियाँ सूनामी लहरों से तबाह हुए कुछ इलाक़ों का दौरा करेंगे. श्रीलंका के तटीय इलाक़ों में क़रीब दस लाख लोग सूनामी लहरों की तबाही से प्रभावित हुए हैं. श्रीलंका में राहत कार्यों में संयुक्त राष्ट्र ने हज़ारों टन राहत सामग्री दी है. पॉवेल ने श्रीलंका के दक्षिणी क़स्बे गॉल में रेडक्रॉस शिविर का दौरा किया जहाँ सैकड़ों विस्थापित पनाह लिए हुए हैं. अमरीकी विदेश मंत्री श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा से भी मुलाक़ात करेंगे और उन्होंने उम्मीद जताई है कि सूनामी लहरों की तबाही से कुछ ऐसे मौक़े पैदा होंगे जिनमें श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव सुलझा लिया जाएगा. इस बीच 200 अमरीकी सैन्य कर्मी श्रीलंका में राहत कार्य करने के लिए पहुँच चुके हैं और टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत और भारी मलबे को हटाने के लिए कुछ और सैन्य कर्मियों के जल्दी ही पहुँचने की योजना है. |
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