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जेएमएम का जेल भरो आंदोलन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पार्टी के नेता शिबू सोरेन की गिरफ़्तारी के विरोध में शनिवार को झारखंड में जेल भरो आंदोलन शुरू किया जिसके तहत हज़ारों कार्यकर्ताओं ने गिरफ़्तारियाँ दीं. झारखंड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गिरफ़्तारियाँ देने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या क़रीब 11 हज़ार बताई है. शिबू सोरेन को 1975 के एक हत्याकाँड मामले में अदालत ने 13 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेजा हुआ है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को राज्य सरकार की बर्ख़ास्तगी की माँग करते हुए कहा कि शिबू सोरेन को राजनीतिक साज़िश के तहत फँसाया जा रहा है. कार्यकर्ताओं ने धमकी दी है कि जब तक शिबू सोरेन को रिहा नहीं कर दिया जाता और उनके ख़िलाफ़ सभी मामले वापस नहीं ले लिए जाते, तब तक जेल भरो आंदोलन जारी रहेगा. गिरफ़्तारियाँ देने वालों में कुछ सांसद और विधायक भी शामिल थे. मामला झारखंड आँदोलन के प्रमुख नेता के ख़िलाफ़ ये मामला 1975 का है जब शिबू सोरेन की अगुआई में हो रही एक रैली में एक दूसरी जगह की ख़बर मिलने के बाद लोग हिंसक हो उठे और उन्होंने वहाँ जाकर मार-पीट की.
इस घटना में 10 लोग मारे गए थे जिनमें नौ मुसलमान थे. शिबू सोरेन पर आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने उस भीड़ को उत्तेजित किया जिसने 11 लोगों को मार डाला था. उनमें 10 ऐसे मुसलमान थे जो ऐसी ज़मीनों पर बस गए थे जिसे आदिवासी अपनी बताते थे. लेकिन शिबू सोरेन का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें ग़लत तरीक़े से निशाना बनाया जा रहा है. यह मामला कुछ साल पहले बंद कर दिया गया था लेकिन कुछ ताज़ा सबूत सामने आने के बाद इस मामले को फिर से खोला गया है. |
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