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शनिवार, 24 जुलाई, 2004 को 02:30 GMT तक के समाचार
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इस्तीफ़ा माँगना जल्दीबाज़ी- जेएमएम
शिबू सोरेन
गिरफ़्तारी वारंट निकलने के बाद से ही शिबू सोरेन का अता-पता नहीं है
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने नेता और कोयला मंत्री शिबू सोरेन से इस्तीफ़ा माँगे जाने के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के क़दम को जल्दीबाज़ी भरा फ़ैसला बताया है.

शिबू सोरेन के ख़िलाफ़ एक सप्ताह पहले झारखंड राज्य की एक निचली अदालत ने गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था जिसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है.

इस मामले पर विपक्ष ने संसद के अंदर और बाहर काफ़ी हंगामा मचाया जिसके बाद प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को शिबू सोरेन के निजी सचिव के पास पत्र भेजकर सोरेन का इस्तीफ़ा माँगा.

 होना ये चाहिए था कि पहले सुनवाई होती फिर कोई फ़ैसला लिया जाता
सुनील कुमार महतो

मगर सोरेन फ़ैसला देंगे या नहीं इस पर रहस्य बना हुआ है.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव और सांसद सुनील कुमार महतो ने अपने नेता से इस्तीफ़ा माँगे जाने को अनुचित बताया है.

मगर बीबीसी से बातचीत में महतो इस सवाल को टाल गए कि शिबू सोरेन इस्तीफ़ा देंगे या नहीं.

उन्होंने कहा,"हमने अदालत में ज़मानत लेने का प्रयास किया है मगर वहाँ किसी कारण से देरी हो रही है. होना ये चाहिए था कि पहले सुनवाई होती फिर कोई फ़ैसला लिया जाता".

शिबू सोरेन ने निचली अदालत से वारंट निकलने के बाद राँची उच्च न्यायालय में ज़मानत की अर्ज़ी दी थी मगर इस पर सुनवाई नहीं हो सकी है.

झारखंड नेता ने इस बात से इनकार किया कि शिबू सोरेन फ़रार हैं.

 शिबू सोरेन अपने लोगों के बीच हैं ताकि वे उन्हें संभाल सकें
सुनील कुमार महतो

उन्होंने बताया कि राज्य की बीजेपी सरकार के इशारे पर उनके नेता को सार्वजनिक तौर पर बेइज़्ज़त करने की कोशिश की जा रही है जिससे उनके समर्थक ख़ासे नाराज़ हैं.

सुनील महतो ने कहा,"शिबू सोरेन अपने लोगों के बीच हैं ताकि वे उन्हें संभाल सकें".

शिबू सोरेन से इस्तीफ़ा माँगे जाने का भारतीय जनता पार्टी ने स्वागत किया है.

भाजपा नेता शाहनवाज़ हुसैन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए इसे विपक्ष की जीत बताया है.

वहीं काँग्रेस नेता गिरिजा व्यास ने पीटीआई से कहा कि प्रधानमंत्री ने शिबू सोरेन से इस्तीफ़ा माँगने का फ़ैसला काफ़ी सोच-समझकर लिया है.

शिबू सोरेन के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट लगभग 30 साल पुराने एक मामले में जारी किया गया है.

ये मामला 1975 का है जब शिबू सोरेन की अगुआई में हो रही एक रैली में लोग हिंसक हो उठे और उन्होंने चिरूडीह नामक गाँव में जाकर मार-पीट की जिसमें 10 लोग मारे गए थे.

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