|
पुलिस शिबू सोरेन को पकड़ने पहुँची | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के कोयला और खान मंत्री शिबू सोरेन को 30 साल पुराने एक मामले में गिरफ़्तार करने के लिए राँची की एक पुलिस टीम दिल्ली पहुँच गई है. झारखंड की जामताड़ा अदालत ने शनिवार को शिबू सोरेन के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी कर दिया था. ये मामला 1975 का है जब शिबू सोरेन की अगुआई में हो रही एक रैली में एक दूसरी जगह की ख़बर मिलने के बाद लोग हिंसक हो उठे और उन्होंने वहाँ जाकर मार-पीट की . इस घटना में 10 लोग मारे गए थे जिनमें नौ मुसलमान थे. शिबू सोरेन ने इस मामले में अग्रिम ज़मानत के लिए राँची हाईकोर्ट में अर्जी दी है जिसपर बुधवार को सुनवाई होनी है. उनके वक़ील ने ये दलील देते हुए वारंट ख़ारिज़ करने की अपील की है कि ये मामला राजनीतिक है और इस मामले में शिबू सोरने को छोड़ अधिकांश लोगों के ख़िलाफ़ मामला वापस लिया जा चुका है. सोरेन 'लापता' फ़िलहाल वारंट जारी होने के बाद से उन्हें सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है और न ही वह सोमवार और मंगलवार को संसद में आए. उन्होंने व्यक्तिगत कारण जताकर सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्ची के समक्ष छुट्टी के लिए आवेदन किया. विपक्ष ने इस मामले पर लोक सभा में विरोध जताया जिससे सदन की कार्यवाही क़रीब बीस मिनट तक स्थगित करनी पड़ी. भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के सदस्यों ने शिबू सोरेन को बर्ख़ास्त करने की माँग की है. मगर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और जब तक सोरेन के ख़िलाफ़ आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक वह निर्दोष हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||