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शिबू सोरेन का मामला गर्माया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के कोयला और खान मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता शिबू सोरेन के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट और रविवार से उनके ग़ायब होने का विवाद बढ़ता जा रहा है. मंगलवार को विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने लोक सभा में इस मुद्दे को उठाया और सदन की कार्यवाही क़रीब बीस मिनट तक स्थगित करनी पड़ी. भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के सदस्यों ने शिबू सोरेन को बर्ख़ास्त करने की माँग की. 1975 में एक रैली में दस लोग मारे गए थे और शिबू सोरेन पर इसी मामले में ग़ैरज़मानती वारंट जारी किया गया है. झारखंड की एक अदालत से शिबू सोरेन की गिरफ़्तारी के वारंट जारी होने के बाद से उन्हें सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है और न ही वह सोमवार और मंगलवार को संसद में आए. शिबू सोरेन के निजी स्टाफ़ का कहना है कि उन्हें गत रविवार सुबह दस बजे से नहीं देखा गया है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और जब तक सोरेन के ख़िलाफ़ आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक वह निर्दोष हैं. उधर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन के गिरफ़्तारी वारंट को चुनौती देने वाली एक याचिका राँची उच्च न्यायालय में दाख़िल की है और दलील दी है कि गिरफ़्तारी वारंट शिबू सोरेन को सौंपा ही नहीं गया. याचिका में शिबू सोरेन की अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी भी दी गई थी जिस पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हुई. इस बीच झारखंड से दो पुलिस अधिकारी शिबू सोरेन की गिरफ़्तारी के लिए मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. |
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