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सोरेन को समर्पण करने का आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रांची के उच्च न्यायलय ने भारत के पूर्व कोयला मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन को दो अगस्त तक निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा है. 1975 में तत्कालीन बिहार के चिरूडीह में हुए एक हत्याकाँड के मामले में झारखंड की एक निचली अदालत ने शिबू सोरेन के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किए थे. हाल में जब ये मामले दोबारा उठा तो शिबू सोरेन लापता हो गए हैं और संसद में भी नहीं गए. इससे उठे राजनीतिक बवाल के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन ने उनसे इस्तीफ़ा माँगा और उनका इस्तीफ़ा फ़ैक्स कर दिया गया. शिबू सोरेन के समर्थक कहते आए थे कि ये राजनीतिक मामला है और उन्हें फंसाया जा रहा है. स्थानीय पत्रकार सलमान रवी के अनुसार सोरेन ने राहत पाने के मकसद से उच्च न्यायालय के सामने याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया कि उन्हें तो इस पुराने मामले से संबंधित 'वारंट मिले ही नहीं और उन्हें फ़रार क़रार दे दिया गया'. सलमान रवी के अनुसार रांची उच्च न्यायलय की दो सदस्यों की खंडपीठ ने उन्हें निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण का आदेश देते हुए ये मानने से इनकार कर दिया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित नहीं है. ऐसा लगता है कि इस न्याययिक आदेश के बाद शिबू सोरिन की मुश्किलें और बढ़ जाएँगी. |
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