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ग़ज़ा में युद्धविराम का प्रस्ताव पारित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ग़ज़ा में युद्धविराम का प्रस्ताव पारित किया है. अमरीका ने इसका समर्थन किया लेकिन प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया. मिस्र और फ़्रांस की मदद से तैयार इस प्रस्ताव में कहा गया है कि युद्धविराम तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए जिसके बाद इसराइली सेना लौटना शुरु कर देगी. सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अमरीकी प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे. लेकिन बाकी सभी सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया और प्रस्ताव 14-0 से पारित हो गया. हालाँकि अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा, हम युद्धविराम प्रस्ताव की भाषा और इसके लक्ष्यों का समर्थन करते हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमेशा इसराइल का समर्थन करने वाले अमरीका ने मतदान में अनुपस्थित होकर ये संकेत दिया है कि इसराइल इस प्रस्ताव को स्वीकार करे. प्रस्ताव में पूरे ग़ज़ा पट्टी में मानवीय सहायता बेरोकटोक पहुँचाने की बात कही गई है. प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद के सदस्यों से अपील की गई है कि वो अपने स्तर से भी ऐसे प्रयास करें जिससे युद्धविराम को टिकाऊ बनाया जा सके. इसमें ख़ास कर ग़ज़ा पट्टी में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी रोकना शामिल है. ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि मिस्र से सुरंगों के ज़रिए हमास तक हथियारों की तस्करी होती रही है. एक स्वर में समर्थन फ़्रांसीसी विदेश मंत्री बर्नार्ड काउचनर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य ग़ज़ा और इसराइल दोनों ओर के लोगों की पीड़ा से दुखी हैं. पिछले 14 दिनों से चल रही लड़ाई में 765 फ़लस्तीनी और 14 इसराइली मारे गए हैं. जब सुरक्षा परिषद में युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी, उससे कुछ घंटे पहले इसराइल ने फिर ग़ज़ा पर हवाई बमबारी की. ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने युद्धविराम प्रस्ताव पारित होने का स्वागत किया. उनका कहना था, "ब्रिटेन पहले दिन से कह रहा था कि हिंसा ख़त्म होनी चाहिए. ख़ैर आख़िर आज रात हम एक स्वर में बात कर रहे हैं. स्पष्ट रुप से युद्धविराम तुरंत लागू करने, हथियारों की तस्करी रोकने और सीमाएँ खोलने पर बात हो रही है." |
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