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सोमवार, 15 दिसंबर, 2008 को 16:46 GMT तक के समाचार
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जूते चलाने वाले के पक्ष में प्रदर्शन

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर जूते चलाने वाले एक टीवी रिपोर्टर की रिहाई के लिए इराक़ की राजधानी बग़दाद में हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे.

रविवार को अचानक इराक़ पहुँचे राष्ट्रपति बुश पर इस टीवी रिपोर्टर ने उस समय जूते चलाए जब वे इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

मुंतज़र अल ज़ैदी अल बग़दादिया टीवी चैनल में काम करते हैं. राजधानी बग़दाद के सद्र सिटी ज़िले में हज़ारों लोगों ने 'हीरो' मुंतज़र अल ज़ैदी की रिहाई के लिए प्रदर्शन किया.

अल बग़दादिया टीवी चैनल के अधिकारियों ने भी अपने पत्रकार की रिहाई की मांग की है. टीवी चैनल का कहना है कि मुंतज़र अल ज़ैदी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इज़हार कर रहे थे.

प्रदर्शन

दूसरी ओर इराक़ी अधिकारियों ने इस घटना को 'शर्मनाक' कहा है. इराक़ी सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुंतज़र ज़ैदी के क़दम से इराक़ी पत्रकारों और पत्रकारिता की मर्यादा को नुक़सान पहुँचा है.

जूते चलाने वाले के पक्ष में प्रदर्शन

मुंतज़र ज़ैदी ने न सिर्फ़ राष्ट्रपति बुश की ओर जूते चलाए बल्कि उन पर चिल्लाए भी. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस इराक़ी पत्रकार के लिए सड़कों पर उतरे लोग शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थक थे.

सद्र सिटी के अलावा बसरा और नजफ़ में भी पत्रकार के समर्थन में प्रदर्शन की ख़बरें हैं.

लेकिन इराक़ी अधिकारियों ने अल बग़दादिया चैनल से मांग की है कि वे टेलीविज़न पर इस घटना के लिए माफ़ी मांगे.

समाचार एजेंसी एपी ने एक इराक़ी अधिकारी के हवाले से बताया है कि मुंतज़र अल ज़ैदी से यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या राष्ट्रपति बुश पर जूते चलाने के लिए उन्हें पैसे दिए गए थे?

अपना नाम न बताने की शर्त पर एक इराक़ी अधिकारी ने यह भी बताया है कि यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस इराक़ी पत्रकार ने उस समय शराब पी रखी थी या कोई मादक पदार्थ का सेवन तो नहीं किया था?

अभिव्यक्ति की आज़ादी

अधिकारियों के अनुसार मुंतज़र ने जो जूते राष्ट्रपति बुश पर चलाए थे, उन्हें सबूत के तौर पर रखा गया है.

 हमें इस बात की चिंता है कि इराक़ में हमारे पत्रकारों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. इस समय इराक़ में हमारे 20 पत्रकार काम कर रहे हैं
अल बग़दादिया के कार्यक्रम निदेशक

अल बग़दादिया टीवी चैनल का मुख्यालय मिस्र की राजधानी काहिरा में है लेकिन इस चैनल के मालिक इराक़ी हैं. चैनल का तर्क है कि मुंतज़र अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रहे थे और अमरीका ने यह दावा किया था कि सद्दाम हुसैन के बाद इराक़ियों को इस अधिकार का इस्तेमाल करने की आज़ादी होगी.

टीवी चैनल ने अपने बयान में कहा है- मुंतज़र के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई तानाशाही शासन की कार्रवाई मानी जाएगी. चैनल के कार्यक्रम निदेशक मुज़हिर अल ख़फ़ाजी ने मुंतज़र को एक स्वाभिमानी अरबी और खुल दिमाग़ का व्यक्ति बताया है.

उन्होंने मुंतज़र ज़ैदी की सुरक्षा पर चिंता जताई और कहा कि पहले भी दो बार उन्हें अमरीकी अधिकारी गिरफ़्तार कर चुके हैं.

 जॉर्ज बुश को एक या दो नहीं 100 जूते मारने चाहिए. कोई नहीं चाहता है कि वे यहाँ आएँ
बग़दाद के एक व्यक्ति

ख़फ़ाजी ने कहा, "हमें इस बात की चिंता है कि इराक़ में हमारे पत्रकारों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. इस समय इराक़ में हमारे 20 पत्रकार काम कर रहे हैं."

रविवार को बग़दाद में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुंतज़र अल ज़ैदी अपनी कुर्सी से उठे और पहले एक जूता और फिर दूसरा जूता राष्ट्रपति बुश की ओर चलाया. लेकिन राष्ट्रपति बुश झुक गए और कोई जूता उन्हें नहीं लगा.

ईमानदारी से कहूँ तो ये घटना ग़ैर ज़रूरी थी. वो एक संवाददाता सम्मेलन था न कि कोई युद्ध. अगर किसी को अपना विचार व्यक्त करना है तो उसे उचित तरीक़े से ऐसा करना चाहिए. ये अच्छा तरीक़ा नहीं
बग़दाद के एक अन्य व्यक्ति

उस समय राष्ट्रपति बुश की बगल में इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी भी खड़े थे. तुरंत ही वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने मुंतज़र को क़ाबू में किया और फिर उन्हें बाहर लेकर चले गए.

जूता चलाते समय मुंतज़र ने अरबी में चिल्लाकर कहा- कुत्ते, ये लो हमारी ओर से आख़िरी सलाम. ये इराक़ की विधवाओं, अनाथों और मारे गए लोगों की ओर से है.

समर्थन

कई अरबी टीवी चैनल इस टीवी फ़ुटेज को बार-बार दिखा रहे हैं. कई अख़बारों ने इसे पहले पन्ने पर बड़े-बड़े अक्षरों में छापा है.

मुंतज़र का भतीजा अपने चाचा की तस्वीर के साथ

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस इराक़ी पत्रकार के ग़ुस्से को मध्य पूर्व के अरबों से समर्थन मिल रहा है, जो क्षेत्र में अमरीका की नीति से उकता गए हैं.

बग़दाद के एक व्यक्ति ने कहा, "जॉर्ज बुश को एक या दो नहीं 100 जूते मारने चाहिए. कोई नहीं चाहता है कि वे यहाँ आएँ."

लेकिन कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं. बग़दाद के ही एक अन्य व्यक्ति ने इसे ग़ैर ज़रूरी बताया. उनका कहना था- ईमानदारी से कहूँ तो ये घटना ग़ैर ज़रूरी थी. वो एक संवाददाता सम्मेलन था न कि कोई युद्ध. अगर किसी को अपना विचार व्यक्त करना है तो उसे उचित तरीक़े से ऐसा करना चाहिए. ये अच्छा तरीक़ा नहीं.

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