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'अल क़ायदा कमज़ोर नहीं पड़ा है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के सर्वेक्षण के मुताबिक चरमपंथी संगठन अल क़ायदा के ख़िलाफ़ अमरीका की अगुआई में जारी अभियान सफल साबित नहीं हो पाया है. सर्वेक्षण में शामिल 29 फ़ीसदी लोगों का कहना था कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने वर्ष 2001 में जो 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' शुरु की थी उसका इस्लामी चरमपंथी नेटवर्क पर कोई असर नहीं पड़ा है. तीस फ़ीसदी लोगों का मानना है कि अमरीकी नीतियों ने अल क़ायदा को और मजबूती दी है. सर्वेक्षण के निष्कर्ष 23 देशों के 24 हज़ार लोगों से हुई बातचीत के आधार पर निकाले गए हैं. मिस्र और पाकिस्तान को छोड़ कर बाकी सभी देशों के लोगों में अल क़ायदा के प्रति नकारात्मक रुख़ दिखा. किसकी जीत, किसकी हार ये पूछे जाने पर कि अल क़ायदा और अमरीका के बीच संघर्ष में कौन जीत रहा है, 49 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि इसमें किसी की जीत नहीं हो रही है.
दूसरी ओर 22 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि इस लड़ाई में अमरीका की पकड़ मज़बूत है, वहीं दस फ़ीसदी लोगों ने कहा कि जीत अल क़ायदा की हो रही है. बीबीसी के रक्षा मामलों के टीकाकार रॉब वाटसन का कहना है कि सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों के मुताबिक आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध ने एक तरह का गतिरोध पैदा कर दिया है. एक सवाल ये पूछा गया, "क्या आप मानते हैं कि 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' से अल क़ायदा मज़बूत हुआ है, कमज़ोर पड़ा है या इसका कोई असर नहीं हुआ?" इसके जवाब में सिर्फ़ 22 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि अमरीकी कार्रवाई से चरमपंथी संगठन कमज़ोर हुआ है. हालाँकि अमरीका में ऐसा मानने वालों की संख्या 34 फ़ीसदी है. चुनौती संवाददाताओं का कहना है कि सर्वेक्षण एस कई ऐसी बातें खुल कर सामने आई है जिनसे पाकिस्तान और मिस्र की सरकारें चिंतित हो सकती हैं.
जब ये पूछा गया कि 'कुल मिलाकर अल क़ायदा के लिए आपकी भावना कैसी है-सकारात्मक, नकारात्मक या मिश्रित?' तो मिस्र के 60 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वो इसके बारे में सकारात्मक या मिश्रित सोच रखते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि अल क़ायदा के नेताओं में कई मिस्र के हैं. अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में मुख्य रुप से शामिल पाकिस्तान में सिर्फ़ 19 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वो ओसमा बिन लादेन के संगठन के बारे में नकारात्मक सोच रखते हैं. यह सर्वेक्षण आठ जुलाई से 12 सितंबर के बीच कराए गए. |
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