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'दुनिया को रूसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि जॉर्जिया पर रूस की ओर से की जा रही कार्रवाई दुनिया के स्वतंत्र देशों को कतई स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के देशों ने यह देखा है कि किस तरह से रूस ने एक संप्रभु देश पर हमला किया है और वहाँ के लोगों द्वारा चुनी गई एक लोकतांत्रिक सरकार को डराने-धमकाने का काम किया है. इस दिशा में अमरीका की भूमिका और जॉर्जिया में संकट की ताज़ा स्थिति पर बुश शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स से विचार विमर्श करेंगे. उधर जॉर्जिया और रूस के बीच युद्धविराम समझौता होने के बाद रूसी सेना जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी से कुछ दूरी पर रुक गई है. जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल साकाश्विली ने युद्धविराम समझौते के बारे में कहा, “मैंने संघर्षविराम समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. लेकिन मुझे ये कहना होगा ये एक अंतिम फ़ैसला नहीं है. हम अभी भी रूस के हमले को झेल रहे हैं और रूस का कब्ज़ा हमारे इलाक़ों पर बरक़रार है.” रूस ने भी यह वादा किया है कि वे युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. हालांकि अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं. दोनों पक्षों के बीच ताज़ा युद्धविराम समझौता फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलाई सारकोज़ी की मदद से तैयार किया गया है. अब अगर रूस पीछे हटने की बज़ाए राजधानी तिब्लिसी में अपनी सेना भेजने लगेगा तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है और शायद इसी वजह से अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश लगातार बयान दे रहे हैं. जॉर्जिया की चिंता रूस के हमलों से हिल चुके जॉर्जिया को लगातार यह चिंता सताती रहती है कि अब रूस की अगली कार्रवाई क्या होगी.
जॉर्जियाई राष्ट्रपति राजधानी तिब्लिसी में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान काफी गुस्से में दिखे. उन्होंने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि रूसी हमले के लिए वह भी एक हद तक ज़िम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अगर जॉर्जिया को नैटो की सदस्यता मिल जाती तो ये नौबत नहीं आती. शुक्रवार को जॉर्जिया के राष्ट्रपति से बैठक के बाद कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि जॉर्जिया ने युद्धविराम समझौता स्वीकार कर लिया है इसलिए रूसी सेना को अब वापस चले जाना चाहिए. दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति देमित्री मेदवेदेव ने कहा कि इस इलाक़े में शांति और सुरक्षा की गारंटी सिर्फ़ रूस ही दे सकता है. उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि अगर उनके नागरिकों और सैनिकों को धमकाया गया तो रूस दोबारा कार्रवाई करेगा. मामले ने तब तूल पकड़ लिया था जब जॉर्जिया ने दक्षिण ओसेतिया में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हमले किए. इस कार्रवाई के ज़वाब में रूस ने अपनी सेना ओसेतिया भेज दी और जॉर्जियाई सेना को पीछे हटना पड़ा. | इससे जुड़ी ख़बरें रूसी सेना तिब्लिसी से बीस मील दूर15 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना 'रूस आक्रामक कार्रवाई से बाज आए'15 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना अमरीकी सेना पहुँचाएगी जॉर्जिया में मदद13 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना जॉर्जिया ने चूक की, रूस चूक कर रहा है11 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना युद्ध रोकने की कोशिशें नाकाम10 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना जॉर्जिया ने संघर्षविराम की पेशकश की10 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना रूस-जॉर्जिया संघर्ष से जुड़े अहम सवाल09 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना रूस-जॉर्जिया की सेनाओं के बीच भीषण लड़ाई09 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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