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रूसी सेना तिब्लिसी से बीस मील दूर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
युद्धविराम समझौता होने के बाद रूसी सेना जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी से बीस मील की दूरी पर है. अमरीका ने रूस से सेना वापस बुलाने की माँग की है. जॉर्जिया के तीन प्रमुख शहरों पर इस वक़्त रूसी सेना का क़ब्ज़ा है और उससे भी गंभीर बात ये है कि रूस की सेना अब जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी से महज बीस मील की दूरी पर है. ये बात प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर बीबीसी संवाददाता नतालिया अंतेलावा कह रही हैं कि रूसी सेना अब राजधानी से सिर्फ़ 20 मील दूर हैं. जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल साकाश्विली ने युद्धविराम समझौते के बारे में कहा है, “ आज मैंने संघर्षविराम समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. लेकिन मुझे ये कहना होगा ये एक अंतिम फ़ैसला नहीं है. हम अभी भी रूस के हमले को झेल रहे हैं और रूस का कब्ज़ा हमारे इलाक़ों पर बरक़रार है. ” लेकिन देखना है कि जॉर्जिया की राजधानी के 20 मील की दूरी से अब रूस पीछे हट जाता है या नहीं. अगर रूस पीछे हटने की बज़ाए अब राजधानी तिब्लिसी में अपनी सेना भेजने लगेगा तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है और शायद इसी डर से अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश लगातार बयान दे रहे हैं. जॉर्जिया का गुस्सा जॉर्जियाई राष्ट्रपति मिखेल साकाशविली ने कहा है कि उन्होंने रूस के साथ युद्धविराम समझौते पर दस्तख़त कर दिए हैं लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं हो सकता. यह युद्धविराम समझौता फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलाई सारकोज़ी की मदद से तैयार किया गया है. जॉर्जियाई राष्ट्रपति राजधानी तिब्लिसी में अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान काफी गुस्से में दिखे. उन्होंने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि रूसी हमले के लिए वह भी एक हद तक ज़िम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अगर जॉर्जिया को नैटो की सदस्यता मिल जाती तो ये नौबत नहीं आती. कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि जॉर्जिया ने युद्धविराम समझौता स्वीकार कर लिया है, इसलिए रूसी सेना को अब वापस चले जाना चाहिए. इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने रूस पर अपनी ताकत का ग़लत इस्तेमाल करने और डराने-धमकाने की नीति अपनाने का आरोप लगाया. बुश की चेतावनी अमरीकी राष्ट्रपति ने रूस से माँग की है कि वो जॉर्जियाई सीमा से अपने सैनिक वापस बुला ले और जॉर्जिया की संप्रभुता का ख़याल रखे.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रुस ऐसा नहीं करता है तो वह अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अलग-थलग पड़ जाएगा. दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति देमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि इस इलाक़े में शांति और सुरक्षा की गारंटी सिर्फ़ रूस ही दे सकता है. उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि अगर उनके नागरिकों और सैनिकों को धमकाया गया तो रूस दोबारा कार्रवाई करेगा. मामले ने तब तूल पकड़ लिया था जब जॉर्जिया ने दक्षिण ओसेतिया में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हमले किए. इस कार्रवाई के ज़वाब में रूस ने अपनी सेना ओसेतिया भेज दी और जॉर्जियाई सेना को पीछे हटना पड़ा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'रूस आक्रामक कार्रवाई से बाज आए'15 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना अमरीकी सेना पहुँचाएगी जॉर्जिया में मदद13 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना जॉर्जिया ने चूक की, रूस चूक कर रहा है11 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना युद्ध रोकने की कोशिशें नाकाम10 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना जॉर्जिया ने संघर्षविराम की पेशकश की10 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना रूस-जॉर्जिया संघर्ष से जुड़े अहम सवाल09 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना रूस-जॉर्जिया की सेनाओं के बीच भीषण लड़ाई09 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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