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विवादास्पद उपन्यास का प्रकाशन रद्द | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंसा की आशंका को देखते हुए अमरीका के प्रकाशक रैन्डम हाउस ने पैग़म्बर मोहम्मद की सबसे छोटी पत्नी आयशा के जीवन पर आधारित एक उपन्यास का प्रकाशन रद्द कर दिया है. द ज्यूल ऑफ़ मदीना नाम का ये उपन्यास पत्रकार शैरी जोन्स ने लिखा है और इसे 12 अगस्त को बाज़ार में उतारा जाना था. लेकिन रेन्डम हाउस की ओर से कहा गया है कि इस उपन्यास से 'कुछ मुसलमानों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं और इसके कारण कुछ लोग हिंसा भड़का सकते हैं.' प्रकाशक ने कहा है कि इसी आधार पर उपन्यास का प्रकाशन टाल देना पड़ा है. रैन्डम हाउस के उप प्रकाशन टॉमस पैरी ने कहा है कि लेखिका, रेन्डम हाउस के कर्मचारी, पुस्तक विक्रेताओं आदि की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये फ़ैसला किया गया है. हिंसा की आशंका इस्लाम के पैग़म्बर मोहम्मद की नौ में से सबसे कमउम्र पत्नी आयशा के जीवन पर आधारित इस उपन्यास की लेखिका शैरी जोन्स ने प्रकाशकों के फ़ैसले पर आश्चर्य जताया है. आयशा को पैगम्बर मोहम्मद की सबसे प्रिय पत्नी कहा जाता है. उपन्यास का समयचक्र उस समय शुरु होता है जब आयशा छह बरस की थीं और वहाँ से लेकर पैग़म्बर मोहम्मद की मृत्यु तक के समय का लेखा-जोखा है. रेन्डम हाउस का ये फ़ैसला इसी हफ़्ते सामने आया है जब वॉल स्ट्रीट जर्नल नाम के अख़बार में मुस्लिम लेखिका असरा नोमानी का लेख छपा. उन्होंने इस बात पर अफ़सोस जताया कि हिंसक प्रतिक्रिया की आशंका के कारण ही प्रकाशकों ने उपन्यास को प्रकाशित नहीं किया. प्रकाशकों को आशंका थी कि इस उपन्यास के छपने से दुनिया भर में वैसी ही प्रतिक्रिया हो सकती है जैसी 1988 में सलमान रुश्दी के उपन्यास द सैटेनिक वर्सेस के कारण हुई थी. सलमान रुश्दी के ख़िलाफ़ ईरान के शासक अयातुल्ला ख़मेनेई ने मौत का फ़तवा जारी कर दिया था. इसके बाद उन्हें लगभग एक दशक तक अज्ञात जगह पर जीवन बिताना पड़ा था. असरा नोमानी ने अपने लेख में लिखा है कि उपन्यास के ख़िलाफ़ माहौल बनाने में विश्वविद्यालय प्रोफ़ेसर डिनीज़ स्पैलबर्ग का भी हाथ है जिन्हें समीक्षा के लिए उपन्यास भेजा गया था. 'नग्नता भरा उपन्यास' टेक्सास विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर स्पैलबर्ग ने टिप्पणी की थी कि ये उपन्यास "भद्दा", "अहमक़ाना" और "नग्नता भरा" है. बाद में उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल में ही जवाब दिया कि अकेले अपने दम पर वो उपन्यास का प्रकाशन नहीं रुकवा सकती थीं. उन्होंने स्वीकार किया,"लोगों को आगाह करना मेरा फ़र्ज़ था कि इस उपन्यास से कुछ मुसलमानों की भावनाएँ भड़क सकती हैं." शैरी जोन्स ने कभी मध्यपूर्व की यात्रा नहीं की है लेकिन उन्होंने अरब इतिहास पढ़ा है और उनका कहना है कि इसी अध्ययन के आधार पर उन्होंने ये उपन्यास लिखा. उन्होंने कहा कि मोहम्मद और आयशा की प्रेम कहानी अदभुत है. रेन्डम हाउस ने कहा है कि इस उपन्यास को दूसरे प्रकाशकों को बेचने के लिए लेखिका स्वतंत्र हैं. |
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