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अमरीकी पूछताछ नीति की आलोचना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सांसदों की एक समिति ने क्यूबा स्थित अमरीकी नौसैनिक अड्डे में बनाए गए ग्वांतानामो बे शिविर में रखे गए क़ैदियों से पूछताछ के नए और कठोर तौर-तरीक़े अपनाने के लिए सैन्य अधिकारियों की आलोचना की है. अमरीकी रक्षा मंत्रालय - पेंटागन के वकीलों ने अमरीकी संसद - कांग्रेस के ऊपरी सदन सीनेट की सशस्त्र सेना समिति के सामने क़बूल किया है कि ग्वांतानामो बे शिविर में रखे गए क़ैदियों से पूछताछ के लिए पानी में डुबोने, चेहरे पर बूँद-बूँद या पानी की धार गिराने (वाटरबोर्डिंग) जैसे जो तरीक़े अपनाए गए वे सैनिकों को यातना सहने के लिए दिए गए प्रशिक्षण पर आधारित थे. सशस्त्र सेना समिति के चैयरमैन सीनेटर कार्ल लेविन ने कहा कि इन लोगों ने "क़ानून को इस तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जिससे लगे कि इनके पूछताछ के तरीक़े वैध नज़र आएँ." अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने समिति के इस आरोप पर अपनी सफ़ाई में कहा है कि अमरीका सभी क़ैदियों के साथ मानवता से पेश आया है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टोनी फ्रैटो ने कहा, "इस सरकार की नीति क़ैदियों के साथ बदसलूकी न हुई है है, न हो रही है और न ही भविष्य में होगी. हमारी नीति रही है इन क़ैदियों से पूछताछ करके वह सूचना हासिल की जाए जिससे देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिले." 'जो सीखा, उसे आजमाया' पूछताछ के विवादित तरीक़ों पर रक्षा मंत्रालय के वकीलों के बयान को सशस्त्र सेना समिति की रपट के प्रारंभिक निष्कर्ष के रूप में जारी किया गया है.
रक्षा मंत्रालय के महाधिवक्ता विलियम हेयंस ने वर्ष 2001 में 11 सितंबर को हुए हमले के नौ महीने बाद यानी जुलाई 2002 में ही इस बात की जानकारी माँगी थी कि दुश्मनों के हाथ लगने पर उनकी पूछताछ के दौरान प्रताड़ना सहने के लिए अमरीकी सैनिकों को क्या प्रशिक्षण दिया गया है. सैनिकों के प्रशिक्षण का यह कार्यक्रम पहले की लड़ाइयों में युद्धबंदी रहे अमरीकी सैनिकों के अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया था. इसमें सैनिकों को ज़िंदा बचने, दुश्मनों को झाँसा देने, पूछताछ का प्रतिरोध करने और बच निकलने के बारे में बताया जाता है जिसे संक्षेप में 'सेरे' भी कहा जाता है. सेरे के प्रशिक्षकों ने विलियम्स हेयंस को सिखाई जाने वाली तकनीकों की जो सूची सौंपी उसमें देखने, सुनने में बाधा पैदा करना, नींद में अवरोध, वाटरबोर्डिंग और तनाव पैदा करने वाली अवस्थाएँ शामिल थीं. इनमें से कई तकनीकों को तत्कालीन रक्षामंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने सेना के वकीलों की आपत्तियों के बावजूद दिसंबर, 2002 में मंज़ूरी दी थी. 'व्हाइट हाउस के दावे ग़लत' संसदीय समिति ने अक्तूबर, 2002 में हुई एक बैठक का भी विवरण जारी किया है जिसमें ग्वांतानामो बे शिविर में मौजूद एक वरिष्ठ सैन्य वकील ने कहा था कि जिन पूछताछ तकनीकों पर कुछ समय पहले पाबंदी लगा दी गई थी उनका इस्तेमाल ग्वांतानामो बे शिविर में गुप्त रूप से हो रहा था जिनमें नींद से वंचित रखने जैसी तकनीक भी शामिल थीं. इस बैठक के विवरण को जिसे पहले गोपनीय रखा गया था.
उस बैठक में लेफ़्टिनेंट कर्नल डियन बीवर ने कहा था, "आधिकारिक तौर पर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है." हालाँकि बीवर ने यह भी कहा कि सैन्य कमांडरों को यह भी डर था कि रैड क्रॉस इस बारे में कुछ पता लगा सकता है. अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के मुख्य क़ानूनी सलाहकार जॉन फ्रेडमैन ने इसी बैठक में कहा था, "यातना दरअसल अपनी-अपनी समझदारी का मामला है. अगर क़ैदी की मौत हो जाती है तो आप ग़लत कर रहे हैं." इन बयानों का विश्लेषण करने के बाद समिति के अध्यक्ष डेमोक्रेट सीनेटर कार्ल लेविन ने कहा कि ये टिप्पणी व्हाइट हाउस के दावों को इन झुठलाती है कि इराक़ की अबू ग़रेब जेल जैसे बंदीगृहों में हुए प्रताड़ना जैसे मामले सिर्फ़ ऐसे कुछ कर्मचारियों के कारनामों की वजह से हुए हैं जो उन्होंने सिर्फ़ अपनी ज़िम्मेदारी के तहत किए. सीनेटर कार्ल लेविन ने कहा, "सच ये है कि अमरीकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने यातना के आक्रामक तरीक़ों की जानकारी माँगी, उसे वैध दिखाने के लिए क़ानून को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और क़ैदियों पर उनके इस्तेमाल की इजाज़त दी." |
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