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'मृत्यु दंड मिले, ताकि शहीद हो सकूँ' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में 9/11 के हमलों के प्रमुख अभियुक्त ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने सैन्य अदालत से मृत्यु दंड दिए जाने की इच्छा जताई है ताकि वो 'शहीद' हो सकें. ग्वांतानामो बे स्थित कैंप में क़ैद ख़ालिद शेख़ मोहम्मद और उनके चार सहयोगी अमरीकी सैन्य अदालत के सामने पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश हुए. इन पाँचों पर हत्या, षडयंत्र और आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं. दोषी पाए जाने पर इन्हें मौत की सज़ा हो सकती है. पाकिस्तान में 2003 में गिरफ़्तार किए जाने के बाद से यह पहली बार है कि ख़ालिद लोगों के सामने पेश हुए. अदालत के सामने ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने अमरीकी वकीलों की सहायता लेने से इनकार कर दिया और अपनी दलील ख़ुद पेश की. अभियोजन पक्ष ख़ालिद और चार अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मौत की सज़ा की मांग कर रहे हैं जिन पर इस मामले की साज़िश रचने का दोष है. मुक़दमे के दौरान मौजूद बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि इस मामले की सुनवाई अमरीकी सैन्य अदालतों की वैधता पर सवाल उठाती है. रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार जैसा पहले की सुनवाइयों के दौरान हुआ था, इस मामले में इन पाँचों लोगों को जबरन उनकी कोठरियों से बाहर निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ी. सबसे ख़तरनाक अमरीका अलक़ायदा में तीसरे नंबर के नेता माने जाने वाले ख़ालिद को 'इतिहास में अब तक के सबसे ख़तरनाक आतंकवादियों में से एक' मानता है. अपनी गिरफ़्तारी के बाद ख़ालिद को सीआईए के एक गुप्त कारावास में रखा गया था जहाँ उनसे सख्ती से पूछताछ हुई.
समझा जाता है कि पूछताछ के दौरान वॉटरबोर्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया जिसके तहत पानी मे डुबाना तक शामिल है. उसके बाद दो साल पहले उन्हें गुआंतानामो बे भेज दिया गया. दोष स्वीकार किया है अमरीकी सेना का कहना है कि ख़ालिद ने न केवल वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में 11 सितंबर, 2001 को हुए हमलों में अपना हाथ होना स्वीकार किया है बल्कि दुनिया भर में अन्य 30 आतंकवादी हमलों की भी ज़िम्मेदारी ली है. इन हमलों में लंदन के बिग बेन और कैनेरी व्हार्फ़ पर हमलों की योजनाएँ शामिल हैं. इस मामले में शामिल चार अन्य अभियुक्त हैं: रमज़ी बिन अलसबीह-एक यमनी नागरिक जिन्हें अमरीका 9/11 के हमलों का समन्वयक मानता है और ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि वह विमान अपहरणकर्ताओं में से एक हो सकते थे लेकिन उन्हें अमरीका का वीज़ा नहीं मिला. मुस्तफ़ा अहमद अस हसावी-एक सऊदी नागरिक जिनके बारे में अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि वह उन दो लोगों में से एक थे जिनका इस्तेमाल ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने पैसा जुटाने के लिए किया. अली अब्दअल अज़ीज़ अली-इन्हें अमर अल बलूची के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि इन हमलों की साज़िश के दौरान वह अपने चाचा ख़ालिद के प्रमुख सहायक थे. वलीद बिन अत्ताश- एक यमनी नागरिक जो, पेंटागॉन के अनुसार, वर्ष 2000 में यमन में अमरीकी पोत यूएसएस कोल पर बमबारी में अपना हाथ होने की बात स्वीकार कर चुके हैं. इस हमले में 17 नाविक मारे गए थे. अत्ताश पर भी 11 सितंबर के हमलों में शामिल होने का आरोप है. इस सब पर जो आरोप हैं उनमें 2, 973 हत्याएँ भी शामिल हैं. यह उन लोगों की संख्या है जो 9/11 के हमलों में मारे गए थे. इन हमलों में मारे जाने वाले लोगों के रिश्तेदारों ने इस मुक़दमे के दौरान मौजूद रहने की इच्छा ज़ाहिर की थी लेकिन सेना का मानना था कि गुआंतानामो बे में इतने लोगों का इंतज़ाम नहीं किया जा सकता. | इससे जुड़ी ख़बरें 9/11 हमलों पर अहम दस्तावेज़ सार्वजनिक13 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 9/11 हमलों का टेलीफ़ोन कॉल विवरण01 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना पेंटागन पर हमले का वीडियो जारी16 मई, 2006 | पहला पन्ना 9/11 के ऑडियो टेप जारी17 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 9/11 के मृतकों के परिजन नाराज़20 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना शेख मोहम्मद ने पर्ल की 'हत्या' की14 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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