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बुधवार, 19 दिसंबर, 2007 को 18:34 GMT तक के समाचार
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तीन ब्रितानी ग्वांतनामो बे से रिहा
ग्वांतनामो बे शिविर
ग्वांतनामो बे शिविर में सैकड़ों बंदी रखे गए हैं
ब्रिटेन के तीन निवासियों को ग्वांतनामो बे शिविर से रिहा कर दिया गया है और वे स्वदेश लौट आए हैं.

वापसी के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

इनमें से एक व्यक्ति अल्जीरिया मूल का, एक जॉर्डन मूल का और तीसरा लीबिया मूल का है. इन्हें ब्रितानी सरकार के हस्तक्षेप के बाद रिहा किया गया है.

इन तीनों लोगों के वकीलों का कहना है कि ग्वांतनामो बे शिविर में अमरीकी गार्डों के दुर्व्यवहार की वजह से इनमें से एक व्यक्ति की आँख जा चुकी है.

वकीलों ने यह भी कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अड्डे पर इन लोगों को प्रताड़ित किया गया. वकीलों ने उस अड्डे को सीआईए की क़ैद क़रार दिया है.

इन तीन में से दो लोगों के वकील क्लाइव स्टैफ़र्ड स्मिथ ने कहा, "ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने बहुत तकलीफ़ उठाई है. उमर देग़ायेज़ की आँख ख़राब हो चुकी है, ग्वांतनामो बे शिविर में अमरीकी गार्ड़ों की प्रताड़ना की वजह से वह दाईं आँख से अंधा हो गया है."

वकील क्लाइ स्मिथ ने कहा, "जमील अल बन्ना इतने वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहा और उसने अपने सबसे छोटे बेटे को अभी तक नहीं देखा है. उसे काबुल में एक अंधेरी जेल में बहुत प्रताड़ित किया गया है."

स्मिथ ने कहा कि यह इन सबके लिए एक बहुत बड़ा दिन है और उम्मीद करते हैं कि ब्रिटेन सरकार इनसे पूछताछ करने के बाद इन्हें अपने घर जाने देंगी ताकि ये अपने परिवारों से मिल सकें और हो सके तो ईद का त्यौहार उनके साथ मना सकें.

इन तीन ब्रितानी निवासियों को लगभग छह साल ग्वांतनामो बे शिविर में रखा गया है. इनमें से दो को गाम्बिया में वर्ष 2002 में गिरफ़्तार किया गया था और तीसरे को पाकिस्तान में.

उधर एक अन्य घटनाक्रम में फ्रांस में ऐसे पाँच लोगों पर आतंकवादी संगठनों से संबंध होने के आरोप में दोषी पाया गया है जिन्हें कुछ समय पहले क्यूबा में अमरीकी नौसैनिक अड्डे में बनाए गए ग्वांतनामो बे शिविर से रिहा किया गया था.

ये पाँचों लोग फ्रांसीसी नागरिक हैं और वे रिहा भी हो गए हैं क्योंकि उन्हें एक वर्ष की जेल की सज़ा हो सकती थी और यह सज़ा उन्होंने पहले ही न्यायिक या पुलिस हिरासत में काट ली है.

अमरीका ने ग्वांतनामो बे शिविर में सैकड़ों लोगों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में बंदी बनाकर रखा गया है लेकिन उन पर कभी कोई आरोप औपचारिक रूप से निर्धारित नहीं किए गए हैं.

उस शिविर में बंद रखे गए लोग अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते हैं.

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