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अब कटघरे में पूर्व इराक़ी उपप्रधानमंत्री | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व उप प्रधानमंत्री तारिक़ अज़ीज़ मंगलवार को अदालत में पेश किए जाएंगे जहाँ उनपर 40 व्यापारियों की हत्या के मामले में मुक़दमे की सुनवाई होगी. तारिक़ सद्दाम हुसैन के शासनकाल के प्रमुख पदाधिकारियों में रहे हैं. वो इराक़ के विदेश मंत्री और फिर उप प्रधानमंत्री पद पर रहे हैं. सद्दाम हुसैन की सरकार के पतन के बाद जिन प्रमुख लोगों पर मुक़दमे चले हैं उनमें तारिक़ का मामला चौथे नंबर पर है. इससे पहले सद्दाम हुसैन और उनके रिश्तेदारों पर मुक़दमे चल चुके हैं. सद्दाम हुसैन को दिसंबर 2006 में फाँसी की सज़ा भी दी जा चुकी है. तारिक़ अज़ीज़ पर आरोप है कि वो 1992 में 40 व्यापारियों की हत्या करवाने के मामले में शामिल थे और इसी के तहत उनपर मुक़दमा चलाया जा रहा है. दरअसल, इन व्यापारियों को 1992 में उस वक्त मौत की सज़ा दी गई थी जब उनपर खाद्यान्न के दामों में बढ़ोत्तरी करने का आरोप लगा था. यह वो दौर था जब इराक़ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा था और ऐसे में इन व्यापारियों ने खाद्यान्न के दाम बढ़ा दिए थे. इसके बाद तेज़ी से मुक़दमा चलाते हुए इन लोगों को मौत की सज़ा सुना दी गई थी. अगर तारिक़ पर इस मामले में आरोप साबित होता है तो उन्हें सज़ा-ए-मौत भी सुनाई जा सकती है. हालांकि तारिक़ के बेटे का कहना है कि उनके पिता पूरी तरह से निर्दोष हैं और जिस वक्त व्यापारियों की हत्या हुई, उस दौरान वो देश से बाहर किसी यात्रा पर थे. तारिक़ के अलावा इस मामले में इराक़ के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रह चुके कैमिकल अली को भी अभियुक्त बनाया गया है. कैमिकल अली के ख़िलाफ़ और भी आरोप लगाए गए हैं. इनमें से कुछ मामलों में उन्हें सज़ा सुनाई जा चुकी है. |
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