|
सद्दाम की बेटी के ख़िलाफ़ वारंट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंटरपोल ने पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सबसे बड़ी बेटी रग़द सद्दाम हुसैन की गिरफ़्तारी के लिए एक वारंट जारी किया है. इराक़ी सरकार ने उन पर देश में आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है. इस वारंट की कार्रवाई इराक़ी सरकार ने एक साल पहले शुरू की थी लेकिन लेकिन वहाँ के गृह मंत्रालय के मुताबिक़ क़ानूनी औपचारिकताएँ अब पूरी की जा सकी हैं. इराक़ी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इंटरपोल ने सदस्य देशों को इस वारंट के बारे में सूचित कर दिया है. आरोप पिछले साल इराक़ी सरकार ने रग़द सद्दाम हुसैन और उनकी माँ यानी सद्दाम हुसैन की पहली पत्नी को फ़रार मोस्ट वंट्डे लोगों की सूची में डाल दिया था. इन पर अन्य आरापों के अलावा देश में विद्रोहियों की मदद करने का भी आरोप है. रग़द सद्दाम हुसैन ने इराक़ में युद्ध अपराधों के लिए चलाए गए मुक़दमे में बचाव के लिए अपने पिता सद्दाम हुसैन की मदद की थी. जब 2003 में सद्दाम हुसैन को अमरीकी फ़ौज ने पकड़ा तो उनकी बेटी ने शक़ ज़ाहिर किया था कि ज़रूर उनके पिता को गिरफ़्तारी से पहले बेहोशी की दवा दी गई होगी क्योंकि वो तो पिंजरे में भी एक शेर की तरह होंगे. पिछले साल दिसंबर में सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा दिए जाने से पहले रग़द सद्दाम हुसैन ने कहा था कि उनके पिता के शव को अस्थाई तौर पर तब तक के लिए यमन में दफ़ाना दिया जाए जब तक अमरीकी फ़ौज को इराक़ से खदेड़ नहीं दिया जाता. रग़द हुसैन पिछले काफ़ी समय से जॉर्ड़न में रह रही हैं लेकिन ये पता नहीं है कि वो अब कहाँ हैं. पिछले साल जॉर्डन सरकार ने कहा था कि वो वहाँ एक शरणार्थी की तरह रह रही हैं. दरअसल इंटरपोल कोई वारंट ख़ुद जारी नहीं करता बल्कि वो किसी देश की तरफ़ से ऐसा कर सकता है. हालाँकि जॉर्डन इंटरपोल का सदस्य है लेकिन ये वारंट उसे या किसी और देश को रग़द के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को मजबूर नहीं कर सकता. इंटरपोल 186 देशों की सदस्यता के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ष्ट्रीय पुलिस संस्था है. इसका गठन 1923 में अलग-अलग देशों की पुलिस के बीच सहयोग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय अपराध रोकने के मक़सद से हुआ था. | इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम के सहयोगी रमादान को फाँसी20 मार्च, 2007 | पहला पन्ना इराक़ के पूर्व उप राष्ट्रपति को फाँसी होगी12 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ी ख़ुफ़िया रिपोर्ट से छेड़छाड़ हुई'09 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना बुश ने फाँसी के तरीके पर आपत्ति जताई17 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना तिकरिती की फाँसी को लेकर विवाद15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना फाँसी की जाँच की माँग उठी15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||