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'मानवाधिकारों का धार्मिक आयाम है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कहा है कि मानवाधिकारों का आदर करने से विश्व की कई समस्याओं का समाधान संभव है. पोप बेनेडिक्ट संयुक्त राष्ट्र विश्व माननाधिकार घोषणापत्र के जारी होने की साठवीं वर्षगाँठ पर संय़ुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे. पोप ने वहां जमा कूटनीतिज्ञों से कहा कि मानवाधिकारों का धार्मिक आयाम है और अग़र सरकारें अपनी जनता के मानवाधिकारों की रक्षा करने में विफ़ल रहती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय जगत को हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया. पोप ने कहा कि अग़र ऐसा हस्तक्षेप होता है तो वह संयुक्त राष्ट्र के नियमों के परिधि में होना चाहिए. पोप ने उन देशों की आलोचना की जो बिना संयुक्त राष्ट्र की इजाज़त के ख़ुद अकेले ही कोई क़दम ले लेते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से संयुक्त राष्ट्र के प्रभुत्व पर असर पड़ता है. पोप ने कहा कि किसी देश को अकेले ही कोई कदम नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सहमति बनाने में मुश्किलें पेश आती हैं और इससे विश्व की जटिल समस्याओं का समाधान ढूढ़ना और मुश्किल हो जाता है. पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जगत की उदासीनता सारी समस्याओं की मुख्य वजह है. उन्होंने कहा कि विश्व की समस्याओं को सुलझाने के लिए सबको मिलजुल कर काम करना होगा. पोप बेनेडिक्ट न्यूयॉर्क स्थित यहूदियों के एक मंदिर यानि सिनेगॉग भी गए. ऐसा करने वाले वे रोमन कैथोलिक चर्च के पहले नेता हैं. |
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