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संघर्ष रुकते ही बग़दाद से कर्फ़्यू हटा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी अधिकारियों ने मेंहदी आर्मी की तरफ़ से संघर्ष रुकने के बाद राजधानी बग़दाद में तीन दिनों से लगे कर्फ़्यू को हटा लिया है. कर्फ़्यू हटने के बावजूद बग़दाद के तीन शिया बहुल इलाक़ों में वाहनों के आने-जाने पर पाबंदी बरक़रार रखी गई है. मेंहदी आर्मी के लड़ाकों और इराक़ी सेना के बीच छह दिनों तक चले संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे गए हैं. संघर्ष में अमरीका और ब्रिटेन के सैनिक भी इराक़ी सेना की मदद कर रहे थे. इस बीच इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने मेंहदी आर्मी के प्रमुख शिया मौलवी मुक्तदा अल सद्र के संघर्ष रोकने वाले फ़ैसले का स्वागत किया है. लेकिन सरकार के प्रवक्ता रहे लेथ कुब्बा का कहना है कि दक्षिणी इराक़ में सैन्य अभियान शुरू करने की मलिकी की नीति से इराक़ी अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुँचा है. उन्होंने कहा, "नुक़सान तो हो ही चुका है. सुरक्षा की स्थिति ख़राब है लेकिन ये समस्या और भी विकराल रूप धारण कर सकती है. अगर स्थिति और बिगड़ी तो बसरा से जा रहे तेल पाइपों को निशाना भी बनाया जा सकता है." आशंकाएं बरक़रार कुब्बा का कहना है कि अमरीका जिस तरह से बसरा में इराक़ी सेना की मदद के लिए बम गिरा रहा है, उससे आम लोगों की मौत का ख़तरा बढ़ रहा है. उनका कहना है कि इसका फ़ायदा उठाकर मुक्तदा अल सद्र ग़रीब लोगों को कह सकता है कि जो वो कह रहे हैं, वो सही है और सरकार को इराक़ियों की फ़िक्र नहीं है. ये लड़ाई शुरू तो बसरा से हुई थी लेकिन फिर ये दक्षिणी इराक़ के कई शहरों और बग़दाद की सद्र सिटी में भी फैल गई थी. अरब पत्रकारों का कहना है कि मुक्तदा अल सद्र ने पीछे हटने का फ़ैसला ज़रूर किया है लेकिन वो पहले भी संघर्ष के दौरान ऐसा कर चुके हैं. इससे पहले भी जब ऐसे संघर्ष में उन्हें नुक़सान हुआ है तो वो कुछ समय संघर्ष रोककर उसे फिर शुरू कर देते हैं. पत्रकारों को आशंका है कि ये लड़ाके इस बार भी ऐसा कर सकते हैं. |
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