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बुधवार, 26 मार्च, 2008 को 23:26 GMT तक के समाचार
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शिया कट्टरपंथियों को 72 घंटे की मोहलत
मुक़्तदा अल सद्र
सद्र ने कहा है कि मलिकी बसरा छोड़े तो समझौता संभव है
इराक़ी प्रधानमंत्री नूर अल मलिकी ने कहा है कि अगर बसरा में संघर्ष कर रहे शिया कट्टरपंथी 72 घंटे में हथियार नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

उधर प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद शिया कट्टरपंथियों के नेता ने कुछ नरमी दिखाते हुए समझौते का प्रस्ताव रखा है.

इराक़ के कट्टरपंथी शिया संगठन के सरबरा मुक्तदा अल सद्र ने कहा है कि अगर इराक़ी प्रधानमंत्री बसरा छोड़ दें तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बन सकती है.

उन्होंने कहा कि समझौता उसी स्थिति में संभव है जब इराक़ी प्रधानमंत्री बसरा के क्षेत्र से बाहर निकल जाएं.

इस सप्ताह की शुरुआत से ही दक्षिणी इराक़ के शिया बाहुल्य इलाके बसरा में अंतरराष्ट्रीय सेना की मदद से इराक़ी सेना शिया चरमपंथी संगठन मेहदी आर्मी के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है.

पिछले तीन दिनों के दौरान दोनों ओर से हुई हिंसा में अभी तक 70 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

इराक़ी प्रशासन ने शिया कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान बुधवार से और तेज़ कर दिया है और इस सैनिक अभियान में अमरीकी सैनिक भी इराक़ी सेना की मदद कर रहे हैं.

सैन्य अभियान

पिछले तीन दिन से इराक़ी सुरक्षाबलों और शिया विद्रोही संगठन मेहदी आर्मी के बीच बसरा में चल रहा संघर्ष यहाँ के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका है.

शिया लड़ाके
पिछले दो दिनों के दौरान 70 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं

इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ख़ुद इस सैनिक अभियान का निरीक्षण करने के लिए बसरा में मौजूद थे.

मलिकी ने कहना है कि उनकी सरकार शहर में सुरक्षा, क़ानून और स्थायित्व को फिर से बहाल करेगी.

उधर मेहदी आर्मी पहले ही कह चुकी है कि अगर उनको निशाना बनाकर हो रहे हमले बुधवार तक नहीं रोके जाते हैं तो वे नागरिक अवज्ञा अभियान छेड़ेंगे.

शिया बाहुल्य क्षेत्र बसरा सुरक्षा की दृष्टि से पिछले कुछ बरसों से ख़ासा संवेदनशील इलाका रहा है.

इराक़ पर 2003 में अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमले के बाद से बसरा में ब्रितानी सैनिक तैनात किए गए थे और उस इलाक़े की ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी. हालांकि पिछले वर्ष के अंत में ब्रितानी सरकार ने बसरा का नियंत्रण इराक़ी सुरक्षाबलों को सौंप दिया था.

तेल के बड़े भंडार वाले स्थान के तौर पर जाने जानेवाला बसरा वर्चस्व और प्रभाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण है.

उल्लेखनीय है कि मेहदी आर्मी में शिया विद्रोही शामिल हैं जो नज़फ़ और देश के अन्य शिया बहुल इलाक़ों की सुरक्षा करने का दावा करती है.

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