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'हिजाब पहनें, श्रृंगार ना करें, वरना...' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के दक्षिणी शहर बसरा के पुलिस प्रमुख मेजर जनरल अब्दुल जलील ख़लाफ़ ने कहा है कि स्थानीय धार्मिक कट्टरपंथी लोग महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसक अभियान चला रहे हैं और स्थानीय पुलिस इस मामले में हाथ डालने से डरती है. पुलिस प्रमुख अब्दुल जलील ख़लाफ़ ने कहा है कि जो महिलाएँ हिजाब या नक़ाब नहीं पहन रही हैं या फिर श्रंगार करती हैं उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और इसके तहत धमकियाँ, डराना-धमकाना और यहाँ तक कि हत्या का भी सहारा लिया जा रहा है. जनरल जलील ख़लाफ़ ने कहा कि जिन महिलाओं को इन हमलों का निशाना बनाया गया उन्हें हत्यारों ने अपर्याप्त कपड़ों में छोड़ दिया और कुछ के पास चेतावनियों वाले नोट भी छोड़े. जनरल अब्दुल जलील ख़लाफ़ ने कहा, "बसरा में महिलाओं के ख़िलाफ़ ख़तरनाक अभियान चल रहा है. वे महिलाओं की हत्या कर देते हैं और चेतावनी लिखी पर्ची छोड़ देते हैं या फिर महिलाओं को अपर्याप्त कपड़े पहना देते हैं ताकि उनके भयावह कारनामों को जायज़ ठहराया जा सके." जनरल ख़लाफ़ ने आरोप लगाया है कि ये हमले शिया लड़ाकों की तरफ़ से किए जा रहे हैं और गत जुलाई से सितंबर के बीच की अवधि में बयालीस महिलाओं की मौत हो चुकी है, हालाँकि अक्तूबर में इस संख्या में कुछ कमी आई है. जनरल ख़लाफ़ ने एक ऐसे ही मामले का ज़िक्र करते हुए कहा, "एक महिला को उसके ही घर में उसके छह साल के बेटे के साथ मार दिया गया. उस महिला के बारे में यह अफ़वाहें फ़ैली थीं कि वह नाजायज़ संबंधों की वजह से गर्भवती हुई थी." बसरा में कुछ महिलाओं ने बीबीसी को बताया कि वे सख़्ती से इस्लामी वेशभूषा पहने बिना घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती हैं. मेजर जनरल अब्दुल जलील ख़लाफ़ को इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने बसरा में क़ानून और व्यवस्था बहाल करने के मक़सद से इसी साल बसरा का पुलिस प्रमुख बनाकर भेजा था. अब्दुल जलील ख़लाफ़ ने कहा कि पुलिस अक्सर ऐसे मामलों में हाथ डालने या जाँच-पड़ताल करने से डरती है.
उन्होंने कहा, "सगे संबंधी इन मामलों की रिपोर्ट करने से घबराते हैं कि कहीं बड़ा विवाद ना खड़ा हो जाए या फिर उन्हें ये मामले हल करने की पुलिस की क्षमता पर ही भरोसा नहीं है." ग़ौरतलब है कि बसरा इलाक़े में ब्रिटेन के सैनिक तैनात हैं और ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी महिला की इस तरह हत्या की निंदा की जाती है और बसरा में महिलाओं के अधिकारों के लिए चलाने की पुलिस प्रमुख की अपील की सराहना भी की है. टाँग में गोली बीबीसी ने लंदन से बसरा में एक महिला वकील से संपर्क किया जिसने अपना नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर बातचीत की. उस महिला का कहना था कि बसरा में "हर दो-तीन दिन में" महिलाओं पर हमले हो रहे हैं. उस महिला वकील ने एक ऐसी घटना का ज़िक्र किया जिसमें विश्वविद्यालय की एक छात्रा की टांग में इसलिए गोली मार दी गई थी कि उसने हिजाब नहीं पहना हुआ था. महिला वकील का कहना था कि दीवारों पर इस तरह की चेतावनियाँ भी लिख दी गई हैं कि महिलाएँ या तो हिजाब पहनें या फिर सज़ा भुगतने के लिए तैयार रहें. इस महिला वकील ने कहा कि ख़ुद उन्हें भी कुछ पुरुषों ने कहा है कि वह काम करने के बजाय शादी करके घर पर बैठें. "उन्होंने मुझसे कहा: अगर कोई हमें तुम्हारी अच्छी क़ीमत देने की पेशकश करता है तो हम तुम्हें उसके हाथों बेचने के बारे में ज़रा भी देर नहीं करेंगे. जब किसी महिला को कामकाज करते हुए या कामयाब देखते हैं, मुझे अफ़सोस है कि वे ख़ुद को उससे कमतर समझते हैं." 'बच्चों के ही सामने' बसरा में एक सरकारी कर्मचारी महिला ने बीबीसी से बातचीत में ख़ुद का नाम उम ज़ैनब बताते हुए कहा कि एक दिन वह काम पर जाने के लिए बस का इंतज़ार कर रही थी कि एक मोटरसाइकिल सवार ने उसे लगभग कुचल ही डाला था. ज़ैनब छह साल के एक बच्चे की माँ हैं.
उम ज़ैनब ने कहा, "मैंने क़मीज़ और स्कर्ट पहने हुए और कुछ श्रृंगार भी किया हुआ था जैसाकि मैं आमतौर पर करती हूँ. मैं बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार कर रही थी कि एक मोटरसाइकिल ने सीधे मुझे टक्कर मारने की कोशिश की. मेरी ख़ुशक़िस्मती थी कि मुझे टक्कर मारने से पहले ही मोटरसाइकिल फ़िसल गई और एक तरफ़ गिर गई." ज़ैनब ने कहा कि उसने अपने साथ हुए इस हादसे से पहले महिलाओं पर इस तरह के हमले होने की ख़बरें सुनी थीं लेकिन उनमें बहुत सी महिलाएं मेरे जैसी क़िस्मत वाली नहीं निकलीं. ज़ैनब ने कहा, "अल मकाल ज़िले में दो दिन पहले ही दो महिलाओं को मार दिया गया था. लोगों का कहना था कि उन्हें पहले से ही चेतावनी मिली थी और कुछ बंदूकधारी उन महिलाओं के घर में घुसे और उन्हें उनके बच्चों के सामने ही मार दिया गया." अलग-अलग धड़े बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बसरा में अलग-अलग गुटों के बीच अपना दबदबा बनाने के लिए संघर्ष चल रहा है इसलिए इन हालात में पुलिस प्रमुख मेजर जनरल अब्दुल जलील ख़लाफ़ किसी का नाम लेने से बच रहे हों इसलिए उन्होंने कहा है कि "कुछ ख़तरनाक अपराधी" शहर की स्थिरता को हिलाने की कोशिश कर रहे हैं. अब्दुल जलील ख़लाफ़ ने कहा कि बसरा शहर में ब्रितानी सैनिकों की मौजूदगी में महिलाओं पर ये हमले होते रहे हैं. ब्रितानी सैनिकों को गत सितंबर में बसरा शहर से हटाकर हवाई अड्डे पर तैनात कर दिया गया था. लेकिन कुछ अन्य लोगों ने शिया लड़ाकों की तरफ़ सीधी उंगली उठाने से गुरेज़ नहीं किया और उन लड़ाकों के बारे में यह भी कहा जाता है कि वे पुलिस में घुसपैठ बनाने में कामयाब हो गए हैं और बसरा पर नियंत्रक करने की कोशिश कर रहे हैं. उम ज़ैनब ने इस तरह के हमले करने वालों को "अंधे, कट्टरपंथी चरमपंथी" क़रार दिया है. उखर शिया विद्रोही मौलवी मुक़्तदा अल सद्र के समर्थक गुट के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि उसके सदस्य महिलाओं पर हमले नहीं करते और न ही महिलाओं को ज़बरदस्ती इस्लामी क़ानून लागू करने के लिए मजबूर भी नहीं करते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'लक्ष्य में नाकाम इराक़ सरकार'05 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बसरा से ब्रितानी सैनिकों की वापसी03 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बग़दाद-बसरा में बम विस्फोट, 23 मरे 28 जून, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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