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सोमवार, 17 मार्च, 2008 को 20:06 GMT तक के समाचार
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करबला में आत्मघाती हमले में 40 मरे
करबला
हमले के बाद घटनास्थल की सफ़ाई करता एक व्यक्ति
इराक़ में पवित्र शहर करबला में सोमवार को हुए एक आत्मघाती हमले में 40 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक धमाके में 50 से ज़्यादा लोग घायल हो गए हैं. उन्होंने बताया की मरनेवालों में सात लोग ईरान के हैं.

जानकारी के मुताबिक यह धमाका शिया समुदाय के सबसे पवित्र स्थानों में से एक, ईमाम हुसैन के मकबरे के पास हुआ है.

जिस वक्त यह धमाका हुआ उस वक्त मकबरे के पास ही स्थित एक नाश्ते की दुकान पर बड़ी तादाद में लोग आराम करने और कुछ खाने-पीने के लिए बैठे हुए थे.

बताया जा रहा है कि धमाका एक महिला आत्मघाती हमलावर ने किया. हमलावर ने इस दुकान में अंदर घुसकर बिना किसी चेतावनी के ख़ुद को धमाके से उड़ा दिया.

अधिकारियों ने बताया है कि इस हमले में जो लोग हताहत हुए हैं, उनमें बड़ी तादाद ईरान से आए तीर्थयात्रियों की है.

हमला

करबला में हुए कुछ बड़े हमले
17 मार्च, 2008- आत्मघाती हमला, 40 मरे, 50 घायल
28 अप्रैल, 2007- कार बम हमला, 55 मरे, 70 घायल
14 अप्रैल, 2007- आत्मघाती हमला, 42 मरे, 150 घायल
5 जनवरी, 2006- आत्मघाती हमला, 60 मरे, 100 घायल
2 मार्च, 2004- बम धमाके में 85 मरे, 230 घायल

करबला प्रांत के गवर्नर अक़ील खज़ाली ने इस बात की पुष्टि की कि सोमवार को हुए हमले में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने लोगों पर हमला किया था.

शियाओं को निशाना बनाकर हुआ यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब इराक़ में शिया लड़ाकों के एक बड़े धड़े ने संघर्षविराम घोषित कर रखा है.

माना जा रहा है कि यह हमला शिया लोगों को भड़काने के मकसद से किया गया है.

हमला ऐसे वक्त हुआ है जब अमरीका के उपराष्ट्रपति डिक चेनी अपनी इराक़ यात्रा पर हैं.

दर्दनाक मंज़र

चश्मदीदों के मुताबिक हमले के बाद घटनास्थल का मंज़र दिल दहला देने वाला था. चारों ओर लोगों के शरीर के टुकड़े, ख़ून बिखरा था और धुंआ फैला हुआ था.

ईमाम हुसैन का मकबरा
लाखों की तादाद में शिया लोग करबला आते हैं

अधिकारियों को संदेह है कि इन धमाकों के पीछे अल क़ायदा का हाथ हो सकता है. हालांकि किसी भी चरमपंथी संगठन ने अभी तक इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

ईरान शिया बाहुल्य आबादी वाला देश है और वहाँ से बड़ी तादाद में लोग करबला आते हैं. इसके अलावा दक्षिणी इराक़ की शिया आबादी भी करबला में ईमाम हुसैन के मकबरे पर आती है.

इराक़ में शिया-सुन्नी समुदाय के लोगों के बीच संघर्ष का असर इस पवित्र शहर पर भी पड़ता रहा है और इस जगह को निशाना बनाया जाता रहा है.

पिछले वर्ष अप्रैल में भी यहाँ भीषण विस्फोट हुए थे जिनमें 100 से ज़्यादा लोगों की जानें गई थीं.

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