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शनिवार, 19 जनवरी, 2008 को 07:26 GMT तक के समाचार
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आशूरा के लिए लाखों शिया करबला में
इराक़ी पुलिस
आशूरा के अवसर पर पहले भी हमले होते रहे हैं
इराक़ में आशूरा के मौक़े पर लाखों शिया मुसलमान करबला में इकट्ठे हुए हैं जिनकी सुरक्षा के लिए इराक़ी प्रशासन ने कड़े इंतज़ाम किए हैं.

अनुमान है कि शनिवार को कुल बीस लाख शिया श्रद्धालु करबला में इकट्ठा होंगे.

इस बीच वहाँ तनाव का माहौल है क्योंकि शुक्रवार को दक्षिणी इराक़ी शहरों में सुरक्षा बलों और शिया समुदाय के लोगों के बीच हुई भिड़ंत में अनेक लोग मारे गए.

सुरक्षा के इंतज़ाम इसलिए भी पुख़्ता किए गए हैं क्योंकि साल 2007 में आशूरा के अवसर पर सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में ढाई सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.

आशूरा के दिन या 'यौमे आशूरा' का सभी मुसलमानों के लिए महत्व है लेकिन शिया मुसलमानों के लिए इसकी ख़ास अहमियत है.

आशूरा करबला में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है. हुसैन पैंग़ंबर हज़रत मोहम्मद के नवासे थे. शिया मुसलमान इस दिन उपवास रख कर उस घड़ी को याद करते हैं.

सुरक्षा की चिंता

शुक्रवार को बसरा और नसीरिया में झड़पों की शुरुआत तब हुई जब कुछ शिया श्रद्धालुओं और सुरक्षा बलों पर एक दूसरे शिया समुदाय के लोगों ने हमले शुरू कर दिए.

सुरक्षा बल
शिया समुदायों के बीच झड़पों में दर्जनों लोग मारे गए हैं

इन झड़पों में अनेक लोग हताहत हुए हैं.

इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने ने इन झड़पों के सात घंटे बाद कहा कि इन दोनों शहरों पर फिर से सुरक्षा बलों ने क़ब्ज़ा कर लिया है.

इन हमलों के बाद आशंका व्यक्त की जा रही है कि आशूरा के मौक़े पर भी हमले हो सकते हैं.

ऐसे आरोप लगाए गए थे कि इससे पहले आशूरा के मौक़े पर सुन्नी समुदाय के चरमपंथियों ने हमले किए थे इसलिए करबला और आसपास के इलाक़े में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि 20 हज़ार से अधिक इराक़ी सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.

चेतावनी

इस बीच इराक़ में शिया समुदायों के बीच झड़पें होती रही हैं.

शुक्रवार को हुए हमलों के बाद शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक नेता मुक़्तदा सद्र ने शियाओं के नेतृत्व वाली सरकार को चेतावनी दी है कि वे संघर्ष विराम को छह महीने की समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद आगे नहीं बढ़ाएँगे.

शिया नेता ने शिया लड़ाकों की संस्था मेहदी आर्मी की ओर से यह संघर्ष विराम घोषित किया था और अगले महीने इसकी समय सीमा ख़त्म हो रही है.

मुक़्तदा सद्र के प्रवक्ता सालाह ओबैदी ने कहा है कि संघर्ष विराम के परिणाम निराशाजनक हैं क्योंकि सुरक्षा बलों के भीतर आपराधिक गिरोह अभी भी सक्रिय हैं और उन्हें सरकार का समर्थन मिल रहा है.

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