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स्कूल पर हमले की व्यापक निंदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यरुशलम के एक यहूदी धार्मिक स्कूल पर हुए चरमपंथी हमले की व्यापक निंदा हुई है. इस हमले में एक फ़लस्तीनी चरमपंथी ने स्कूल में घुसकर कम से कम से आठ लोगों की हत्या कर दी थी. इस हमले में कई लोग घायल भी हुए थे. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून से लेकर फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास तक कई नेताओं ने इस हमले की निंदा की है. उधर इसराइल ने कहा है कि इस हमले के बाद भी फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ चर्चा जारी रहेगी. लेकिन इसराइली सरकार ने प्रतिद्वंद्वी गुट हमास की निंदा की है. लेकिन इस हमले की निंदा को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित किए जाने को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है क्योंकि लीबिया सहित कई सदस्य चाहते थे कि निंदा प्रस्ताव में गज़ा पर पिछले हफ़्ते हुए इसराइली हमले की भी निंदा की जाए. इस हमले में बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी नागरिक मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वाइटली चर्किन, जो इस समय सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहे हैं, ने कहा कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि कोई चरमपंथी हमला चाहे जितना जघन्य हो लेकिन इसराइल-फ़लस्तीनी विवाद का ज़िक्र किए बिना उसकी निंदा कैसे की जा सकती है. हमला इसराइली सरकार का कहना है कि एक फ़लस्तीनी बंदूकधारी ने पश्चिमी यरुशलम स्थित एक यहूदी धार्मिक स्कूल में घुसकर कम से कम से आठ लोगों की हत्या कर दी है. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक बंदूकधारी रात के खाने के वक्त डाइनिंग हॉल में घुसा और उसने गोलीबारी शुरू कर दी. उस समय वहाँ खासी भीड़भाड़ थी और लगभग 80 लोग जमा थे. इस गोलीबारी में कम से कम 30 लोग घायल भी हुए हैं. ख़बरों के अनुसार गोली चलानेवाले को सुरक्षाबलों ने मार दिया है.
ये स्कूल यहूदी धार्मिक अध्ययन के लिए जाना जाता है और यहाँ 18 से 30 साल की उम्र के छात्र अध्ययन करते हैं. बीबीसी के मध्य पूर्व संपादक जर्मी बोवेन का कहना है कि हमले के बाद इसराइली सरकार पर जनता का जवाबी कार्रवाई के लिए भारी दबाव है. लेकिन वह कब और कैसे कार्रवाई करेगा, इसका अंदाज़ नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में इसराइल पर ये सबसे गंभीर हमला माना जा रहा है. यरुशलम पर सन् 2007 से कोई हमला नहीं हुआ था. इस हमले की ख़बर के बाद ग़ज़ा में हवाई फ़ायर कर खुशी मनाई गई. लेबनान के हिज़बुल्ला नियंत्रित टीवी चैनल ने ख़बर दी है कि इस गोलीबारी के पीछे 'जलील फ्रीडम बटालियंस' नामक संगठन है. इधर फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने इस हमले की प्रशंसा की है लेकिन इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है. हमास का कहना था कि ग़ज़ा पर इसराइली हमले के विरोध में ये फ़लस्तीनियों की चेतावनी है. |
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