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गज़ा में हिंसा की संयुक्त राष्ट्र में निंदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गज़ा में फ़लस्तीनियों और इसराइल के बीच जारी संघर्ष की निंदा करते हुए दोनों पक्षों से कहा है कि वो तत्काल संघर्ष रोकें. पिछले कुछ दिनों के दौरान दोनों ओर से हुए हमलों में कम से कम 80 लोगों की मौत हो चुकी है. मरनेवालों में अधिकतर फ़लस्तीनी हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई जहाँ गज़ा में पैदा संघर्ष की स्थिति पर चर्चा की गई. बैठक में बान की मून ने इसराइल की ओर से हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इसराइल ने असंगत और अत्यधिक बल प्रयोग किया है. साथ ही उन्होंने फ़लस्तीनियों की ओर से हो रहे रॉकेट हमलों की भी निंदा की और कहा कि ऐसे 'चरमपंथी हमले' तुरंत रोके जाएं. स्थिति चिंताजनक ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से गज़ा क्षेत्र में फ़लस्तीनी लड़ाकों और इसराइल के बीच संघर्ष चल रहा है पर शनिवार को स्थिति बहुत गंभीर हो गई.
इसराइल की ओर से हुए ताज़ा हमलों में 50 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे गए हैं. दो इसराइली सैनिकों की भी मौत हुई है. वहाँ मौजूद चिकित्सक दल ने बताया था कि मृतकों में आठ बच्चे और 16 फ़लस्तीनी चरमपंथी थे. जबकि इसराइल ने सभी मारे गए लोगों को चरमपंथी बताया. इन हमलों में 150 से ज़्यादा फ़ल़स्तीनी और कुछ इसराइली घायल हो गए थे. 2005 में गज़ा से इसराइली फ़ौजों के हटने के बाद से यह सबसे हिंसक दिन रहा है. स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई थी कि फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस मसले पर तत्काल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की माँग की थी. इसके बाद सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में अपनी बात रखते हुए फ़लस्तीनी प्रतिनिधि रियाद मंसूर ने कहा कि गज़ा में इसराइली हमलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जो चुप्पी साध रखी है, उसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है और न ही सही ठहराया जा सकता है. दोनों ओर से जारी संघर्ष को रोकने का प्रयास करने के लिए अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस मध्यपूर्व की यात्रा पर जा रही हैं और इस दौरान वो दोनों पक्षों के प्रमुखों से बातचीत करेंगी. |
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