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हमलों में 32 फ़लस्तीनियों की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा पट्टी पर बुधवार से इसराइली फ़ौजों के हमलों में 32 फ़लस्तीनी मारे गए हैं. मारे जाने वालों में चरमपंथी और आम नागरिक दोनों ही हैं. इसराइली फ़ौजों ने ग़ज़ा पट्टी को घेर रखा है और उनका कहना है कि ये हमले दक्षिणी इसराइल पर हुए फ़लस्तीनी रॉकेट हमलों के जवाब में किए जा रहे हैं. इसराइल ने ये हमले बुधवार की सुबह शुरू किए थे. गुरुवार को हुए एक रॉकेट हमले का शिकार चार फ़लस्तीनी बच्चे बने. ये बच्चे मैदान में खेल रहे थे. इसी तरह के एक और हमले में फ़लस्तीनी चरमपंथियों के अलावा एक छह महीने के बच्चे की भी मौत हो गई. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ ग़ज़ा पट्टी में लोग अपने गाड़ियों में बाहर सड़कों पर निकलने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें ख़तरा है कि उनके वाहन इसराइली रॉकेट का निशाना बन सकते हैं. हमले जारी बीबीसी संवाददाता के अनुसार गुरुवार रात को भी ग़ज़ा पट्टी पर इसराइली रॉकेटों के हमले जारी रहे. लोगों का कहना है कि इसराइली सेना और फ़लस्तीनी चरमपंथी पीछे हटने को तैयार नहीं और ग़ज़ा पट्टी की सीमा के इलाक़ों में और ज़्यादा हिंसा हो सकती है. इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट ने कहा, "इसराइल उन लोगों से किसी तरह की कोई शांति वार्ता नहीं कर सकता जो हमारे आम नागरिकों की हत्या कर रहे हैं."
ओलमार्ट ने कहा, "हम चाहते हैं कि फ़लस्तीनी बेगुनाह इसराइली नागरिकों पर कस्साम रॉकेटों के हमले बंद करें ताकि शांति वार्ता हो सके." वहीं, ज़ोर-शोर से फ़लस्तीनियों के अधिकार की बात करने वालीं हन्नान अशरावी का कहना है इसराइल दोहरे मापदंड अपनाता है. उनका कहना है, "यदि आप इसराइल की सुरक्षा की शर्त रखते हैं लेकिन इसराइली सेना को फ़लस्तीनियों की हत्या करने और उन इलाक़ों में तबाही करने से नहीं रोकते तो कुछ नहीं हो सकता." |
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