BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 26 जनवरी, 2008 को 14:07 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
ग़ज़ा के लोगों का मिस्र में जाना जारी
फ़लस्तीनी लोग
फ़लस्तीनी लोगों ने मिस्र में जाने के लिए कारों का भी सहारा लिया
फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी से लोगों का सीमा लाँघकर मिस्र में जाना शनिवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा और ऐसे में इसराइल की गज़ा पट्टी की नाकेबंदी कर वहाँ फ़लीस्तीनी गुट हमास को कमज़ोर करने की नीति कमज़ोर पड़ती दिखाई दे रही है.

इसराइल और फ़लस्तीनी संगठन फ़तह के प्रभाव वाला फ़लीस्तीनी प्रशासन अब तक हमास के साथ बातचीत करने से बचते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो हुआ है उससे लगता है कि उन्हें हमास का साथ लेना पड़ सकता है.

ग़ज़ा पट्टी में हमास के नेतृत्व वाला प्रशासन है.

शनिवार को लगातार चौथा दिन था जब ग़ज़ा से फ़लस्तीनी लोग मिस्र में घुसे और अब तो लोग कारों में सवार होकर मिस्र में घुस रहे हैं ताकि ज़रूरी सामान ख़रीद सकें.

इसराइल ने पिछले सप्ताह ग़ज़ा की नाकाबंदी कर दी थी जिससे लोगों को खाने-पीने का और दूसरा ज़रूरी सामान मिलना बंद हो गया था. यहाँ तक कि ईंधन की कमी के कारण बिजली संयंत्र भी बंद हो गया था.

इसराइल के राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ का कहना है कि वो नहीं चाहते कि ग़ज़ा पट्टी के लोग भूखे रहें या बिजली की कमी से घोर अंधेरे में रहने को मजबूर हों लेकिन इस इलाक़े से इसराइल में रॉकेट दाग़े जा रहे थे इसीलिए ये क़दम उठाए गए हैं.

साथ ही इसराइल के राष्ट्रपति ने कहा कि अब जो स्थिति बनी है उसे मिस्र ही संभाल सकता है, “अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मिस्र की ही है और हम समझते हैं कि मिस्र इस बात को गंभीरता से लेकर वापिस स्थिति को नियंत्रण में कर लेगा और पहले जैसी स्थिति बन सकेगी.”

जानकार कहते हैं कि इसराइल के राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ भले ही ये कह रहे हों लेकिन वास्तविकता तो ये है कि इस मामले से हमास का ही फ़ायदा हुआ है.

बुलडोज़रों से सीमा की बाड़ तोड़कर जिस तरह से ग़ज़ा के लोग मिस्र में घुसे उससे इसराइल की नाकेबंदी की कूटनीति को बड़ा झटका लगा है.

जानकार कहते हैं कि इसराइल रॉकेट हमले रोकेने के लिए नाकेबंदी करके फ़लस्तीनी लोगों को परेशानी में डालकर दबाव बनाता रहा है ताकि ये हमले रोके जाएँ लेकिन इस बार फ़लस्तीनी लोग मिस्र में घुसकर ज़रूरत का सामान ख़रीद रहे हैं.

अमरीका और इसराइल सहित उसके मित्र देश हमास को महत्व नहीं देना चाहते.

शांति प्रक्रिया

मध्य पूर्व के शांति दूत बनकर गए ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का कहना है कि ये नीति बदलनी भी नहीं चाहिए, “इस पूरे मुद्दे में हमास को ये फ़ायदा नहीं मिलना चाहिए कि लोग उससे बात करना शुरू कर दें क्योंकि पहले इसराइल पर रॉकेट दागे गए और वहीं से ये समस्या शुरू हुई लेकिन साथ ही ये भी ज़रूरी है कि ग़ज़ा के आम लोगों का ख़याल रखा जाए.”

इसराइली नाकेबंदी से परेशान ग़ज़ा के लोग
ग़ज़ा के लोगों को खाने-पीने की चीज़ों की किल्लत हो गई

लेकिन अब पश्चिम के लिए नई समस्या उठ खड़ी हुई है. जिन जगहों पर ग़ज़ा और मिस्र की सीमा टूटी है और जिनसे ग़ज़ा की क़रीब 15 लाख की आबादी में से आधे से ज़्यादा लोग मिस्र में आ दाख़िल हो गए थे, अब वहाँ सीमा चौकियाँ बनाने होंगी.

इसके लिए मिस्र को हमास से बात तो करनी ही होगी ताकि दोनों मिलकर सीमा चौकियाँ बनाएँ और यही पश्चिमी देश नहीं चाहते हैं.

ऐसे में पश्चिमी देशों के साथ मिलकर चलने की कोशिश करने वाले फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास क्या करते?

तो उन्होंने हमास को बातचीत का न्यौता तो दिया लेकिन ग़ज़ा प्रशासन पर 2007 में किए गए क़ब्ज़े के लिए उसकी बुराई करते हुए, "हमास ने ग़ज़ा पर कब्ज़ा कर एक आपराधिक काम किया है लेकिन वो भी फ़लस्तीनी हैं."

"न वो हमें नकार सकते हैं और न ही हम उन्हें. लेकिन ग़ज़ा से उनको पीछे हटना चाहिए. बहरहाल, हमने हमास से बातचीत की एक योजना बनाई है और मुझे लगता है वो भी इसे नकार नहीं सकते.”

यानी कुल मिलाकर फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने हमास के सामने बातचीत की पेशकश की है लेकिन कहा है कि बातचीत से पहले हमास ग़ज़ा से पीछे हटे.

दूसरी ओर, हमास की प्रतिक्रिया भी दिलचस्प है. हमास ने कहा है कि बातचीत का न्योता उन्हें स्वीकार है लेकिन कोई भी बातचीत बिना किसी शर्त के होनी चाहिए.

बीबीसी संवाददाता सेबैस्टियन अशर का कहना है कि अगर हमास के साथ मिस्र भी बातचीत का रास्ता खोलता है तो हमास उसे अपनी जीत की तरह देखेगा.

इससे जुड़ी ख़बरें
ग़ज़ा सीमा पर दबाव और बढ़ा
24 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना
इसराइल ने ग़ज़ा चौकी बंद की
18 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना
शांति के मुद्दे पर बातचीत शुरू
14 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना
इसराइली टैंक ग़ज़ा में घुसे
11 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>