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ग़ज़ा सीमा पर दबाव और बढ़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी में फ़लस्तीनियों का सीमा लांघकर मिस्र में जाना बुधवार गुरूवार दूसरे दिन भी जारी रहा और हज़ारों लोग सीमा पार करके मिस्र में पहुँच गए हैं. ग़ौरतलब है कि इसराइल ने पिछले सप्ताह ग़ज़ा पट्टी जाने वाला रास्ता बंद कर दिया था जिसके बाद ग़ज़ा में लोगों को समस्याएँ होने लगी थीं. ईंधन की कमी होने की वजह से बिजली संयंत्र बंद हो गया था जिसके बाद बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई थी और बहुत से लोगों को खाद्य सामग्री की आपूर्ति भी बाधित हो गई थी. ग़ज़ा पट्टी में बहुत से फ़लस्तीनी बुधवार को रफ़ा चौकी के ज़रिए मिस्र की तरफ़ दौड़ने लगे थे और गुरूवार को भी यह सिलसिला जारी रहा. ये लोग रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदने के लिए मिस्र के इलाक़ों में गए हैं. हालाँकि मिस्र के सैकड़ों सुरक्षा कर्मी उस इलाक़े में पहुँच गए हैं जहाँ ख़बरों के अनुसार फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने सीमा बाड़ को नष्ट कर दिया था. इन सुरक्षा कर्मियों ने फिलहाल फ़लस्तीनी लोगों को मिस्र की सीमा में दाख़िल होने से रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं. ग़ज़ा पट्टी में हमास के नेताओं ने कहा है कि वह मिस्र के साथ एक ऐसा सीमा समझौता करना चाहता है जिसके तहत फ़लस्तीनियों को ज़रूरत पड़ने पर ज़रूरी चीज़ें मिस्र से आसानी से ख़रीदने की इजाज़त मिल जाए. इसराइली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने कहा है कि जब तक फ़लस्तीनियों की तरफ़ से इसराइली इलाक़ों में रॉकेट दागे जाते रहेंगे तब तक ग़ज़ा पट्टी के लोगों को सामान्य ज़िंदगी जीने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा था कि वह ग़ज़ा की नाकेबंदी से पैदा हुए हालात को को मानवीय संकट में नहीं बदलने देंगे. ग़ौरतलब है कि ग़ज़ा पट्टी इलाक़े में हमास के नेतृत्व वाला प्रशासन है. जून 2007 में जब ग़ज़ा का प्रशासनिक नियंत्रण हमास के हाथ में आया था तभी से इसराइल ने ग़ज़ा के बहुत सी सीमा चौकियाँ बंद कर दी थीं. मिस्र के सीमावर्ती शहर रफ़ा में बीबीसी संवाददाता इयन पैनेल का कहना है कि बुधवार को लगभग पचास हज़ार फ़लस्तीनी लोग कारों और घोड़ागाड़ियों के ज़रिए सीमा पार करके मिस्र में दाख़िल हो गए थ और उनका मक़सद आवश्यक वस्तुएं, दवाइयाँ ख़रीदना और परिवार के लोगों से मिलना था.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि गुरूवार को भी यही हाल देखा गया और ऐसा लग रहा है कि जैसे रफ़ा शहर को ग़ज़ा के लोगों ने छीन लिया है. रफ़ा शहर की मुख्य सड़क जैसे खुला बाज़ार बन गया है जहाँ सभी तरह का सामान बेचा जा रहा है जिसमें ईंधन, बकरियाँ और अन्य तरह का सामान शामिल है. ऐसी भी ख़बरें मिल रही हैं कि रफ़ा में क़ीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि ग़ज़ा में कुछ सामान तो काफ़ी सस्ता मिलने लगा है. संवाददाताओं का कहना है कि अब बड़ा सवाल ये है कि आगे क्या होगा. मिस्र की प्रतिक्रिया फ़लस्तीनियों के मिस्र में घुस जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अधिकारियों ने बुधवार को कहा था कि वे फ़लस्तीनियों को वापस जाने के लिए बाध्य नहीं करेंगे. जबकि इसराइल ने माँग की है कि मिस्र अपनी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बहाल करे. एक इसराइली अख़बार ने बुधवार को दावा किया था कोई साढ़े तीन लाख लोग मिस्र की सीमा में जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि ज़्यादातर लोग वहाँ खाना और ईंधन ख़रीदने के लिए गए है. इसराइल माँग कर रहा है कि मिस्र को अपनी सीमा फिर से सील करनी चाहिए तो मिस्र की प्रतिक्रिया एकदम अलग है. मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ ने कहा है कि उन्होंने सीमा पर तैनात सेना से कहा है कि वे फ़लस्तीनियों को मिस्र की सीमा में आने दें ताकि वो लोग जाकर खाना ख़रीद सकें. इस बीच हमास के नेता इस्माइल हानिया ने मिस्र और दूसरे फ़लस्तीनी गुट के साथ बातचीत की ज़रूरत बताई है.
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