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पैगंबर के कार्टून फिर छापे गए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
डेनमार्क के अनेक अख़बारों ने इस्लाम के पैगमंर मोहम्मद के उन कार्टूनों में से कई को फिर से बुधवार को प्रकाशित किया जो पहली बार 2005 में छापे गए थे और उनके छपने से दुनिया भर में मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे. ये कार्टून फिर से छापने वाले अख़बारों ने कहा है कि वे ऐसा करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपना संकल्प दोहराना चाहते हैं. डेनमार्क पुलिस ने मंगलवार को कहा था कि उसने कुछ ऐसे व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था जो पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बनाने वाले एक कार्टूनिस्ट को कथित रूप से मारने की योजना बना रहे थे. पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि इन संदिग्ध लोगों को मंगलवार को हिरासत में लिया गया था और "ऐसा करके आतंकवाद से संबंधित हत्या की साज़िश को नाकाम कर दिया है." पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पहली बार डेनमार्क के अख़बार यूलैंस पोस्तेन ने सितंबर 2005 में छापे थे जिनमें पैगंबर मोहम्मद को एक दाढ़ीवाले व्यक्ति के रूप में दिखाया गया जिसकी पगड़ी में बम लगा है. उन कार्टनों का मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर विरोध किया था और अनेक देशों में डेनमार्क के दूतावासों को भी निशाना बनाया गया था. डेनमार्क के राष्ट्रीय टेलीवीज़न ने ये कार्टून फिर से बुधवार को दिखाए और 11 समाचार पत्रों ने उन कार्टूनों को बुधवार को फिर से छापा है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाचारपत्रों के संपादकों की दलील है कि कार्टून बनाने वाले की मंशा चाहे जो रही हो लेकिन चित्र बनाने के लिए किसी की भी जान को ख़तरा नहीं होना चाहिए. संपादकों का कहना है कि हाल ही में ये मालूम चला है कि कुछ लोग यूलैंस पोस्तैन अख़बार के कार्टूनिस्ट कुर्त वेस्तरगॉ को मार डालना चाहते थे और उसी के विरोध में ये कार्टून फिर छापा गया है. कार्टून छापने वाले एक अख़बार बेर्लिंग्स्क टिवेन्द की संपादक लिज़्बेत क्नुसेन का कहना है कि ये एक सैद्धांतिक मामला है, “हम अभिव्यक्ति के अधिकार के हामी हैं और हमारा कहना है कि धार्मिक या अन्य मुद्दों के आधार पर हम बोलने की आज़ादी पर किसी भी प्रकार का अंकुश लगाने को स्वीकार नहीं करेंगे.” उधर डेनमार्क का विदेश मंत्रालय सभी तरह के कूटनीतिक प्रयास कर रहा है जिससे दूसरे देशों में इसकी प्रतिक्रिया में हिंसा न भड़क उठे. वहीं डेनमार्क में विपक्षी पार्टियों ने पुलिस की आलोचना करते हुए कहा है कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन विदेशियों को पूरी क़ानूनी प्रक्रिया का सहारा नहीं लेने दिया जा रहा. डेनमार्क के राष्ट्रीय एकता मंत्री ने कहा कि पकड़े गए दोनों विदेशी व्यक्तियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरे के संदेह में देश निकाला दिया जा सकता है. उधर 40 साल के मोरोक्को मूल के जिस तीसरे डेनमार्क नागरिक को गिरफ्तार किया गया था, उसे रिहा कर दिया गया है. वहीं कार्टून बनाने वाला एक व्यक्ति और उसकी पत्नी दोनों को अभी छिपकर रहना पड़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान में कार्टून के विरोध में प्रदर्शन28 मई, 2006 | पहला पन्ना डेनमार्क के कार्टूनिस्ट को अफ़सोस नहीं19 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना नाइजीरिया में 16 की मौत18 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना कार्टून मामले में मंत्री का इस्तीफ़ा18 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना यूरोपीय संसद में कार्टून मुद्दे पर बहस15 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इंडोनेशिया ने डेनमार्क की आलोचना की12 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना फ्रेंच अख़बारों के ख़िलाफ़ मुक़दमा11 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना 'इस्लाम और पश्चिम के बीच गहरी खाई'10 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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