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दमन की जाँच के लिए बर्मा पहुँचे दूत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजनीतिक बंदियों से मिलने और सितंबर में सैनिक सरकार विरोधी आंदोलन के दमन की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार दूत पाउलो सर्गियो पिन्हिरो बर्मा पहुँच गए हैं. पिछले चार सालों में पहली बार संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रतिनिधि को बर्मा ने अपने यहाँ आने की इज़ाजत दी है. संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि पाउलो सर्गियो पिन्हिरो ने कहा है कि वे यहाँ राजनीतिक बंदियों से मिलने के लिए प्रतिबद्ध हैं. पिन्हिरो ने कहा है कि वे इस बात का पता लगाने के लिए भी कटिबद्ध हैं कि सितंबर में लोकतंत्र समर्थन आंदोलनों के दौरान सैन्य शासन के दमन में कितने लोगों की मौत हुई. पिन्हिरो को उम्मीद है कि वे इस सच्चाई का पता लगा पाएँगे कि हालिया हिंसा में कितने प्रदर्शनकारी मारे गए, कितने घायल हुए और कितने अब भी जेल में है. कितने लोकतंत्र समर्थकों के साथ क्या हुआ, इसको लेकर सरकार और मानवाधिकार संगठनों के आँकड़ों में बड़ा अंतर है. पिन्हिरो कहा है कि अगर उन्हें बर्मा की जेलों में बिना पाबंदी के जाने नहीं दिया गया तो वे तुरंत वापस लौट जाएँगे. पिन्हिरो ने उन जेलों और बंदी शिविरों की सूची भी सौंपी है, जहाँ वे जाना चाहते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सू ची पार्टी के सदस्यों से मिलीं09 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना गम्बारी दूसरी बार बर्मा पहुँचे03 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना 'संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि बर्मा छोड़ें'02 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा की सेना में 'बच्चों की भर्ती'31 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना रंगून में दंगा निरोधक पुलिस तैनात26 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस भारत-चीन-रूस प्रतिबंध के ख़िलाफ़24 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना बर्माः लोकतंत्र की राह आसान नहीं है23 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा में अशांति: एक छात्र की नज़र से 06 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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