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दक्षिणी यूरोप में भारी गर्मी, सैंकड़ों मरे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूरा दक्षिण-पूर्वी यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में है. हंगरी में झुलसा देने वाली गर्मी के कारण पिछले एक हफ़्ते में सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. हंगरी की 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंटल हेल्थ' की उपनिदेशक अन्ना पाल्डी ने बीबीसी को बताया कि मध्य हंगरी में 15 से 22 जुलाई के बीच लू लगने से 230 मौतें हो चुकी हैं. हंगरी के पड़ोसी देश रोमानिया में लू लगने से 30 लोगों की मौत हुई हैं. पाल्डी का कहना है कि हाल के वर्षों में गर्मी के कारण होने वाली मौतों की संख्या इस बार सबसे अधिक है. हंगरी के दक्षिणी शहर किस्कुनहलास में तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस पर पहुँच गया. फ़सल बर्बाद दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देशों में इस वर्ष भारी गर्मी पड़ने के कारण जंगलों में कई बार आग लगने की घटना सामने आई है और इससे अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. सर्बिया में गर्मी के कारण 30 फ़ीसदी फ़सल चौपट हो चुकी है. सबसे ज़्यादा नुकसान गेहूं, सोयाबीन और सब्ज़ी की खेती को पहुँचा है.
जहाँ दक्षिण-पूर्वी यूरोप गर्मी से बेहाल है, वहीं उत्तरी यूरोप भारी बारिश और बाढ़ से परेशान है. ब्रिटेन के कई इलाक़े जलमग्न हो चुके हैं. पिछले 60 वर्षों के इतिहास में यहाँ ऐसी बाढ़ नहीं आई थी. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने कहा है कि इस बाढ़ से सबक लिया जाएगा और ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे. ऐसा माना जा रहा है कि ये विपरीत स्थितियाँ जलवायु परिवर्तन की ओर संकेत करती है. इसी वर्ष के शुरू में संयुक्त राष्ट्र की संस्था आईपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस सदी के दौरान पृथ्वी के तापमान में एक से चार फ़ीसदी की वृद्धि हो सकती है. इस हफ़्ते सोमवार को बुल्गारिया में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. बुल्गारिया के इतिहास में इतनी ज़्यादा गर्मी कभी रिकॉर्ड नहीं हुई थी. ग्रीस, इटली और मैसिडोनिया के जंगलों में आग लगने की घटनाएँ बढ़ी हैं. |
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