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गुरुवार, 07 जून, 2007 को 14:23 GMT तक के समाचार
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जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहमति
बुश और एंगेला मर्केल
अमरीका कटौती पर लक्ष्य को लेकर आपत्ति जता रहा है
जर्मनी में हो रहे जी-8 के देशों के सम्मेलन में एकत्रित नेताओं में सहमति हो गई है कि जलवायु परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार गैसों के उत्सर्जन में कटौती की जाए.

इस सहमति का दुनिया भर के नेताओं ने स्वागत किया है.

जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने बताया कि सभी देश इस पर सहमत हैं कि सबसे पहले जलवायु को गर्म करने वाली गैसों की मात्रा में बढ़ोत्तरी को रोकना होगा और फिर इसमें कमी करनी होगी.

रिपोर्टों में कहा गया है कि जी-8 के नेता संयुक्त राष्ट्र ढाँचे के अंतर्गत क्योटो समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद अन्य समझौते पर बातचीत के लिए भी सहमत हो गए हैं.

गैसों में कटौती के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है.

विश्लेषकों का कहना है कि लक्ष्य निर्धारित न होने की वजह से क्योटो समझौते का विकल्प तैयार करने की प्रक्रिया में तेज़ी आने की संभावना नहीं है.

हालांकि एंगेला मर्केल वर्ष 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 50 प्रतिशत कटौती की वकालत कर रही हैं लेकिन अमरीका किसी भी लक्ष्य पर अपनी आपत्ति जताता रहा है.

एंगेला मर्केल ने समझौते को सही दिशा में उठाया गया बड़ा क़दम बताया है. उन्होंने कहा कि इस साल के आख़िर में बाली में जलवायु परिवर्तन पर होने वाले सम्मेलन से पहले यह समझौता अच्छी शुरुआत है.

एंगेला मर्केल ने इस पर भी ख़ुशी जताई कि वर्ष 2012 में क्योटो संधि के बाद जलवायु परिवर्तन पर एक और संधि की बात भी होगी.

अमरीकी रुख़

बीबीसी संवाददाता मैट मकग्राथ का कहना है कि इस साल की शुरुआत में यदि कोई कहता कि राष्ट्रपति बुश ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले हैं तो लोग उसे सनकी मान लेते.

जॉर्ज बुश
लोग मानते थे कि बुश के पद पर रहते इस विषय पर कोई बात हो ही नहीं सकती

इस कारण साफ़ था कि राष्ट्रपति बुश ने इस साल जनवरी से पहले अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कभी भी जलवायु परिवर्तन का ज़िक्र नहीं किया था.

लेकिन अब जबकि उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं तो सवाल पूछा जा रहा है कि क्या अमरीका ने अपनी नीति बदल ली है या फिर उसने एक अप्रभावी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं?

हालांकि जर्मनी और यूरोपीय संघ साफ़ लक्ष्य तय करने का दबाव डाल रहे थे कि अगले चालीस साल में ग्रीन हाउस गैसों को आधा कर लिया जाए और पृथ्वी का तापमान दो डिग्री से ज़्यादा न बढ़ने दिया जाए.

लेकिन सहमति का जो अंतिम दस्तावेज़ आया उसमें लक्ष्य की कोई बात नहीं की गई थी.

हालांकि पर्यावरण के लिए काम करने वाले संगठन इस बात से ख़ुश नहीं हैं कि कोई लक्ष्य तय नहीं किया गया लेकिन वे इस बात का स्वागत करते हैं कि अमरीका को गंभीरता से बात करने के लिए राज़ी कर लिया गया है.

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