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जी-8 की बैठक में परमाणु ऊर्जा पर ज़ोर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस की राजधानी मॉस्को में उद्योगिक देशों के गुट जी-8 के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के बाद अमरीका और रूस ने दुनिया की ऊर्जा की माँग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की बात कही है. इस बैठक के बाद अमरीकी ऊर्जा मंत्री सेम्युल बोडमैन का कहना था कि उन्हें उम्मीद है कि दुनिया में परमाणु ऊर्जा के उद्योग को पुनर्जन्म होगा. रूस की सरकार का कहना था कि जी-8 मंत्री सहमत थे कि परमाणु ऊर्जा का विकास दीर्घकालीन ऊर्जा माँग को पूरा करने के लिए ज़रूरी है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना था कि विश्व की ऊर्जा स्थिति सभी के लिए एक चुनौति है और ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए कि बाज़ार में इस विषय में अनिश्चितता ख़त्म हो. रूस के ऊर्जा मंत्री विक्टर ख़रिस्टैंको का कहना था कि दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को झटकों से मुक्त करने के लिए बड़ा पूँजी निवेश ज़रूरी है. रूसी ऊर्जा मंत्रालय का ये भी कहना था कि दुनिया में परमाणु ऊर्जा का सुरक्षित इस्तेमाल पर्यावरण को बचाने और विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जर्मनी और जापान जैसे कुछ देशों को परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल पर आपत्ति है. | इससे जुड़ी ख़बरें देश का पहला गैसीफ़ायर पावर प्लांट 27 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान मंहगी पड़ेगी ऊर्जा क्षेत्र की अनदेखी22 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान फ्रांस में लगेगा परमाणु फ़्यूज़न बिजलीघर28 जून, 2005 | विज्ञान अंतरिक्षयान चलाने की नई कोशिश विफल22 जून, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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