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मंहगी पड़ेगी ऊर्जा क्षेत्र की अनदेखी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा ऊर्जा की खपत करने वाला देश है. तेल की खपत को ही देखें तो भारत अपनी ज़रूरत का दो दिहाई तेल आयात करता है. आज भी भारत तेल, कोयला जैसे परंपरागत स्रोतों पर निर्भर है पर ऐसे में, जबकि विश्व बाज़ार में तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है, भारत को इस बात का एहसास हो रहा है कि कुछ करने की ज़रूरत है और वह भी जल्द. पर क्या आठ प्रतिशत आर्थिक विकास दर का ध्येय रखने वाला भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को नियंत्रित रख सकता है जबकि अनुमान है कि अगले 20 वर्षों में भारत की ज़रूरत चार गुना बढ़ जाएगी. पर्यावरणविद और टेरी के महानिदेशक डॉ. आरके पचौरी बताते हैं, "अगर आप जापान का पिछले 30 साल का इतिहास देखें तो उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को गिरने नहीं दिया है लेकिन साथ-साथ ऊर्जा की खपत भी कम की है. चीन में पिछले 20 वर्षों में आर्थिक वृद्धि क़रीब चार गुना हुई है परंतु ऊर्जा की खपत उन्होंने दोगुना बढ़ाई है." पचौरी ने कहा, "ऐसे तकनीकी रास्ते अपनाए जा सकते हैं जिससे कि ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल कर सकें और साथ-साथ जो ग़ैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत हैं, उसका भी इस्तेमाल कर सकें." ऊर्जा स्रोत पर सवाल यह उठता है कि क्या भारत ने अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के बारे में कोई रणनीति बनाई है. सरकार की ओर से एक ऊर्जा समन्वय समिति गठित की गई है जिसमें तेल, कोयला, उर्जा, वित्त मंत्रालय और योजना आयोग देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने और ऊर्जा बनाने पर रणनीति तैयार करेंगे. देश के 56 प्रतिशत घरों में आज बिजली नहीं है और बढ़ते तेल बिल और उस पर सब्सिडी का खर्चा सरकार पर भारी पड़ता है. ऐसे में अक्षय ऊर्जा के बारे में भारत सोच रहा है. अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत राज्यमंत्री विलास मुत्तमवार का कहना है, "हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमारे यहाँ ये संसाधन बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं. हमारे यहाँ सौर ऊर्जा, विंड पॉवर, हाइड्रो पॉवर और बायोमास की ढेरों संभावनाएं मौजूद हैं. " अब अपारंपरिक ऊर्जा के स्रोतों का इस्तेमाल प्रयोगात्मक नहीं रहा है. इसका पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर कई जगह सफल प्रयोग जैसे सुंदरबन में, मध्यप्रदेश के बेतूल में हो रहा है. टेरी में कार्यरत डॉ समीर मैथिल कहते हैं कि देश के एक लाख 25 हज़ार गाँवों में बिजली नहीं पहुँचती और 25 हज़ार गाँव तो ऐसे हैं जहाँ ग्रिड नहीं बनाए जा सकते. हालांकि डॉ मैथिल के अनुसार सौर ऊर्जा, बायोमास आदि की सफलता उसके व्यापक इस्तेमाल पर निर्भर करती है. तेल का खेल आज भी देश में ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत तेल, गैस और कोयला ही है. पर तेल का खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलता है.
इसकी कीमतों में भी राजनीति चलती है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है. ईरान से गैस पाइपलाइन लाने की भारत की मंशा पर अमरीका अपनी अप्रसन्नता दिखा चुका है. हालांकि तेल मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव तलमिज़ अहमद दबाव को सही नहीं मानते. अहमद कहते हैं, "तेल का मामला है, उसमें सियासत ज़रूर होती है लेकिन हमारी कोशिश है हम इसमें प्रतियोगिता नहीं करें और समझौते के आधार पर आगे बढ़े. जहाँ तक हमारी नीति है, जो बाहरी दवाब डालने की कोशिश करेगा वह नाकामयाब रहेगा." उन्होंने बताया, "रूस, चीन, जापान, रिपब्लिक ऑफ कोरिया और ब्राजिल इसमें हमारे ख़ास सहयोगी हो सकते हैं. आजकल अफ्रीका में भी कोशिश कर रहे हैं कि हम वहां भी पहुँचें. वहाँ हमारे सहयोगी है नाईजिरिया और अंगोला." एहतियात ज़रूरी अगर चीन से तुलना करें तो भारत जहाँ अपने तेल आयात का दो तिहाई हिस्सा आयात करता है वहीं चीन केवल एक तिहाई भाग आयात करता है. भारत में जहाँ पाँच अरब बैरल तेल के भंडार हैं वहीं चीन के पास 18 अरब बैरल का भंडार है. ऐसे में भारत को तेल की खपत कम करने, इसके संरक्षण के बारे में भी सोचना चाहिए. आरके पचौरी मानते हैं, "उद्योगों में ऊर्जा इस्तेमाल करने की जो तकनीक है उनको बदलना ज़रूरी है. हम अपने घरों में कंपैक्ट और सिंकलैंप लगाएं, एयरकंडीशनर अच्छे से अच्छा लगाए. पब्लिक ट्रॉस्पोर्ट को बढावा दें. हज़ारों इस तरह के साधन हैं इसको जबतक प्रयोग में नहीं लाएंगे तब तक ये सब केवल कल्पना ही रह जाएंगी." इतना तो साफ़ है कि अगर भारत तेल की खपत कम करने, ऊर्जा के बेहतर उपयोग करने और अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की खोज के साथ–साथ लोगों की जीवन शैली में बदलाव नहीं लाता तो कल के लिए विश्व शक्ति बनने के सजोए सपने, सपने रह जाएंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें फ्रांस में लगेगा परमाणु फ़्यूज़न बिजलीघर28 जून, 2005 | विज्ञान अंतरिक्षयान चलाने की नई कोशिश विफल22 जून, 2005 | विज्ञान अब केले से बनेगी बिजली27 अगस्त, 2004 | विज्ञान 'ईंधन की कमी से जन्म दर घटेगी'13 फ़रवरी, 2004 | विज्ञान इटर: तलाश अनंत ऊर्जा के स्रोत की21 दिसंबर, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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