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भारत सरकार को चाहिए गांधी का पत्र | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महात्मा गांधी के हस्तलिखित पत्र को अब भारत सरकार हासिल करने की कोशिश कर रही है. यह पत्र गांधी ने अपनी हत्या के 19 दिन पहले लिखा था. गांधी ने एक मित्र को यह पत्र लिखा था और यह लंदन की क्रिस्टीज़ नीलाम घर में अगले हफ़्ते, तीन जुलाई को नीलाम होने जा रहा है. भारत सरकार ने स्वीकार किया है कि वह इस पत्र को राष्ट्रीय धरोहर की तरह हासिल करने की कोशिश कर रही है. दो गाँधीवादियों बसंत कुमार बिड़ला और सत्या पॉल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर आग्रह किया था कि सरकार को इस पत्र को हासिल करने की कोशिश की जानी चाहिए. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस पत्र की बोली 12000 पाउंड (लगभग दस लाख रुपए) तक लग सकती है. भारत के विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय ने इस पत्र को हासिल करने की कोशिशें शुरु कर दी हैं और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग से कहा गया है कि वे क्रिस्टीज़ के संचालकों से चर्चा करें. उधर ब्रिटेन के उच्चायुक्त माइकल ऑर्थर ने एक टेलीविज़न चैनल से कहा है कि उनसे इस बारे में अब तक संपर्क नहीं किया गया है. माना जा रहा है कि सरकार के लिए नीलामी में हिस्सा लेना संभव नहीं होगा और इस पत्र को हासिल करने के लिए वैकल्पिक तरीक़े तलाश करने होंगे. उल्लेखनीय है कि 1988 में गांधी के कुछ पत्रों की इसी तरह से लंदन में नीलामी हुई थी तब कुछ प्रवासी भारतीयों ने इसे अपने देश के लिए ख़रीद लिया था. |
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