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बड़े काम के हैं भारतीय प्रवासी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगर आप सोचते हैं कि विकसित देशों में बसे भारतीय टैक्सी चलाने और पेट्रोल पंप स्टेशनों पर काम करने तक ही सीमित हैं तो आपको अपनी जानकारी दुरुस्त करने की ज़रूरत है. ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर इकोनोमिक कोऑपरेशन और डेवलपमेंट (ओईसीडी) की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित देशों में बसे भारतीयों की हैसियत छोटे-मोटे कामगारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें योग्यतम व्यक्तियों में शुमार किया गया है. 1961 में स्थापित ओईसीडी 30 देशों का संगठन है और इसका मुख्यालय फ़्रांस की राजधानी पेरिस में है. भारतीयों का बोलबाला रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों में पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय चीन के बाद दूसरे नंबर पर हैं. ओईसीडी के अनुसार, "चीन और भारत के प्रवासियों के बारे में ख़ास बात ये सामने आई है कि वे यहाँ बसे दूसरे अन्य देशों के मुक़ाबले कहीं अधिक उच्च शिक्षित हैं." विदेशी मूल के लोगों पर तैयार ओईसीडी के डेटाबेस के अनुसार आधे से अधिक प्रवासी भारतीय कम से कम स्नातक हैं. वर्ष 2005 में ब्रिटेन में उच्च दक्ष प्रवासी कार्यक्रम के तहत प्राप्त सभी जिन लोगों को मान्यता दी गई, उनमें से 40 फ़ीसदी भारतीय थे. यही नहीं इस कार्यक्रम के तहत आवेदन करने वालों में भी भारतीय पहले नंबर पर थे और उनके बाद पाकिस्तानियों की संख्या सबसे अधिक थी. वर्ष 2005 में ऑस्ट्रेलिया में इसी तरह के कार्यक्रम के तहत चीन और भारतीय मूल के लोगों की तादाद 30 फ़ीसदी थी. ओईसीडी देशों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे अधिक लगभग 13 फ़ीसदी चीन के हैं, जबकि भारतीय छात्रों की संख्या छह फ़ीसदी है. | इससे जुड़ी ख़बरें रोज़गार देने में चीन से आगे भारत20 जून, 2007 | कारोबार 'महात्मा गांधी थे सबसे बड़े प्रवासी'07 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस प्रतिभा पलायन का रुख़ पलटा29 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस अमरीका को संवारने में भारतीय सबसे आगे05 जनवरी, 2007 | कारोबार भारतीय मूल के पाँच अमरीकी सम्मानित14 मई, 2006 | पहला पन्ना छोटी उम्र में ही बड़ा कारनामा08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सेवा शुल्क, टिप, नज़राना या घूस...01 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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