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'ईरान में सेंसरशिप बहुत सख़्त है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता शीरीन आब्दी का कहना है कि ईरान में सेंसरशिप बहुत सख़्त हो गई है. नोबेल सम्मान पा चुकीं शीरीन आब्दी का कहना है कि ईरान सरकार देश के अंदर की ख़बरों को बाहर जाने से रोक रही है. बीबीसी से एक बातचीत में आब्दी ने कहा है कि ईरानी न्यायपालिका ईरानी और अमरीकी बुद्धिजीवियों को जासूस क़रार देने की कोशिश कर रही है जिसका कुछ भी सकारात्मक परिणाम नहीं होगा. पिछले दिनों ईरानी मूल के चार अमरीकी नागरिकों को हिरासत में लिए जाने के ख़िलाफ़ अमरीका के काफ़ी विरोध प्रदर्शन हुए हैं. शीरीन आब्दी ईरानी मूल की अमरीकी बुद्धिजीवी हाले इस्फ़ंदरी का मुक़दमा लड़ने की कोशिश कर रही हैं, उनका कहना है कि इस्फ़ंदरी को बिना मुक़दमा चलाए जासूस घोषित करना ग़ैर-क़ानूनी और अनैतिक है. ईरानी न्यायपालिका का कहना है कि शीरीन आब्दी जिसका चाहे उसका बचाव कर सकती हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है. मगर शीरीन आब्दी का कहना है कि उनकी मुवक्किल इस्फंदरी को क़ैद-ए-तन्हाई में रखा गया है और उनकी बहुत कोशिशों के बावजूद उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई है. उनका कहना है कि वे अपने मुवक्किल का बचाव कैसे कर सकती हैं जब तक कि वे उससे मिल ही न सकें. अपनी मुवक्किल के बारे में आब्दी का कहना है कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं क्योंकि वे उन्हें वर्षों से जानती हैं. आब्दी का कहना है कि हाले इस्फ़ंदरी जैसी दोहरी नागरिकता वाले लोगों को इसलिए हिरासत में रखा जा रहा है क्योंकि ईरान की सरकार अंदर की हालत को देश के बाहर नहीं जाने देना चाहती. आब्दी का कहना है कि ईरान में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का हनन हो रहा है, इस्लाम के नाम पर महिलाओं और लड़कियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. साथ ही आब्दी ने पश्चिमी देशों की भी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई की धमकी देने की वजह से सरकार को जनता का दमन करने का मौक़ा मिल गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका-ईरान बातचीत 'सकारात्मक'28 मई, 2007 | पहला पन्ना कई सीमाओं को तोड़कर बंधन जोड़ा25 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'इंटरनेट की सेंसरशिप ज़ोर पर'18 मई, 2007 | विज्ञान शिया महिलाओं को तलाक़ का हक़ मिला26 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान को मिली एक महीने की समयसीमा31 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 75 प्रतिशत तलाक़ महिलाओं की ओर से!08 मई, 2005 | भारत और पड़ोस शरीयत जागरुकता अभियान पर विचार29 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस प्यार का बिल्कुल अनोखा अंदाज़27 मार्च, 2005 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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