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अमरीका-ईरान बातचीत 'सकारात्मक' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान और अमरीका के बीच पिछले तीस सालों में पहली बार हुई द्विपक्षीय बातचीत को अमरीका ने 'सकारात्मक' बताया है और कहा कि 'मुद्दे पर ही' बात हुई. बातचीत के एजेंडे में केवल इराक़ की सुरक्षा स्थिति का मुद्दा ही शामिल था. बैठक इराक़ की राजधानी बग़दाद में करीब चार घंटे तक चली. बैठक में इराक़ में अमरीका के राजदूत रयान क्रॉकर, ईरान के राजदूत हसन काज़मी और इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिक़ी शामिल थे. रयान क्रॉकर ने कहा है कि बैठक में इराक़ के प्रति नीति पर आम सहमति थी. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि अब ज़रूरत इस बात की है ईरान वाकई में कुछ क़दम उठाए. रयान क्रॉकर ने बताया कि उन्होंने ईरान से कहा है कि वो इराक़ में मिलिशिया गुटों को हथियार देना बंद करे. 'अच्छा क़दम' अभी एक दिन पहले ही ईरान ने कहा है कि उसे देश में ऐसे कई जासूसी नेटवर्क के बारे में पता चला है जो अमरीका और उसके सहयोगी चला रहे हैं. ईरानी अधिकारियों ने स्विस राजदूत को इस बारे में तलब किया है. ईरानी टीवी का कहना है कि इस नेटवर्क के ज़रिए 'घुसपैठ' और साज़िश रचने' की कोशिश हो रही थी. ईरान में अमरीका के हितों का प्रतिनिधित्व स्विट्ज़रलैंड करता है. उधर अमरीका में व्हाइट हाउस का कहना है कि वो ख़ुफ़िया मामलों से जुड़े ख़बरों की न ही पुष्टि करता है और न ही इनकार करता है. 1980 में ईरान में क्रांति के बाद सोमवार को हुई बैठक अमरीका-ईरान के बीच पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत थी. बीबीसी संवाददाता पॉल रेनॉल्डस का कहना है कि अमरीका ने पहले इस बातचीत के लिए शर्तें रखी थीं लेकिन बाद में वो पीछे हट गया. इसमें इराक़ सरकार को ईरान के समर्थन की माँग शामिल थी. बैठक से पहले इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने इस बातचीत को क्षेत्र के लिए अहम क़दम बताया. वहीं तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने सरकारी रेडियो पर कहा कि अब अमरीका ईरान से इराक़ के बारे में बातचीत करना चाहता है जो अच्छा संकेत है. बातचीत में ईरान का रुख़ वहाँ के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़मेनेई ने तय किया है. उन्होंने कहा है कि बैठक का मकसद इराक़ पर क़ब्ज़ा करने वाले अमरीका को ये याद दिलाना है कि इराक़ को सुरक्षित बनाना उनकी ज़िम्मेदारी है. ईरान में बीबीसी संवाददाता के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सांकेतिक महत्व ज़रूर है लेकिन किसी बड़े फ़ैसले पर पहुँचने की उम्मीद कम ही है. | इससे जुड़ी ख़बरें कार बम धमाके में 19 लोगों की मौत28 मई, 2007 | पहला पन्ना सद्र की शांति योजना का स्वागत26 मई, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ की रणनीति के लिए अहम समय'24 मई, 2007 | पहला पन्ना इराक़ युद्ध के लिए नए बजट को मंज़ूरी24 मई, 2007 | पहला पन्ना ईरान पर और प्रतिबंध लगें: अमरीका24 मई, 2007 | पहला पन्ना ईरान ने अमरीकी नीति की आलोचना की04 मई, 2007 | पहला पन्ना इराक़ ने लगाई मदद की गुहार03 मई, 2007 | पहला पन्ना ईरान में इस्लामी क्रांति क्यों हुई?31 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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