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शुक्रवार, 04 मई, 2007 को 15:27 GMT तक के समाचार
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ईरान ने अमरीकी नीति की आलोचना की
ईरान के विदेश मंत्री मनुशेहर मुत्तकी
मुत्तकी ने इराक़ से अमरीकी सेना वापसी के लिए समय सीमा तय करने की माँग की
इराक़ की सुरक्षा स्थिति पर मिस्र में हुए सम्मेलन में ईरान के विदेश मंत्री ने इराक़ में अमरीकी नीति की कड़ी आलोचना करते हुए शिया सुन्नी हिंसा के लिए अमरीकी नीति को ज़िम्मेदार ठहराया है.

ईरान के विदेश मंत्री मुनश्हर मोतक्की ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अमरीका को इराक़ पर कब्ज़ा करने से उपजी कठिनाईयों की ज़िम्मेदारी कबूलनी चाहिए न कि दूसरों की तरफ ऊंगली उठानी चाहिए.

ऐसा माना जा रहा था कि इस सम्मेलन के दौरान अमरीका और ईरान के बीच बातचीत शुरु हो सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

क्या नहीं हुआ!

बीबीसी संवाददाता के अनुसार यह सम्मेलन इस बात के लिए ज़्यादा जाना जाएगा – कि इस सम्मेलन में क्या नहीं हुआ.

भारी अटकलों के बावजूद अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और ईरान के विदेश मंत्रि मनुशेहर मोत्तकी के बीच कोई बैठक नहीं हुई.

खट्टा इतिहास...
 ईरान के साथ तो खट्टे संबंधों का एक इतिहास है जो 27 साल पुराना है लेकिन हमारी तरफ से ईरान के लोगों के साथ न तो हमें कोई समस्या है, न ही कोई तनाव.
कोंडोलीज़ा राइस

सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री ने अमरीका की कड़े शब्दों में आलोचना भी की और कहा कि अमरीका को इराक़ में हिंसा और चरमपंथी गतिविधियों के लिए पूरी ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने सैनिकों की वापसी के लिए एक स्पष्ट योजना तैयार करनी चाहिए.

सम्मेलन के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में जब अमरीकी विदेश मंत्री राइस से पूछा गया कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि अमरीका ईरान की तरफ अपनी विदेश नीति में बदलाव लाए - इस पर कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि अमरीका को किसी भी देश के साथ मुश्किल संबंध रखने की कोई इच्छा नहीं है.

कोंडोलीज़ा राइस ने कहा, "ईरान के साथ तो खट्टे संबंधों का एक इतिहास है जो 27 साल पुराना है लेकिन हमारी तरफ से ईरान के लोगों के साथ न तो हमें कोई समस्या है, न ही कोई तनाव."

इराक़ की अपील

उधर इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने पड़ोसी देशों से अपील की है कि वे अपने बदले लेने के लिए उनके देश को रणक्षेत्र न बनने दें.

मलिकी ये अपील ऐसे समय में आई है जबकि अमरीका, ईरान और सीरिया से ज़्यादा सकारात्मक भूमिका की अपेक्षा कर रहा है, वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने इराक़ में हिंसा के लिए अमरीका को ही ज़िम्मेदार ठहराया है.

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने कहा कि वो इराक़ को चरमपंथियों का ठिकाना नहीं बनने देंगे, सात ही उन्होंने क्षेत्र के सभी देशों से अपील की कि वो चरमपंथियों को इराक़ में घुसने से रोकने में मदद करें.

मलिकी ने कहा, "हम इराक़ को चरमपंथी गुटों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने देंगे. इसके लिए मैं अपने पड़ोसी देशों से गुज़ारिश करना चाहूंगा कि वो इराक़ में चरमपंथियों की घुसपैठ रोकने में मदद करे और उनको मिलने वाली धन, प्रचार और राजनीतिक और मीडिया का समर्थन भी रोकें."

शर्म अल शेख में हुए इस सम्मेलन में इराक़ में स्थिरता क़ायम करने पर ज़ोर दिया गया. इसके लिए कुछ वादों के बदले और वित्तीय सहायता मुहैय्या कराने की योजना पर भी सहमति हुई. साथ ही इराक़ के पुनर्निर्माण के लिए अरब लीग की बैठक करने पर भी विचार हुआ.

सीरिया से बातचीत

ईरान के साथ अमरीका की बातचीत तो नहीं हुई लेकिन सीरिया के साथ इसी सम्मेलन के दौरान अमरीका ने बातचीत शुरु की.

सीरिया के साथ कूटनीतिक पहल करते हुए कोंडोलीज़ा राइस ने दो साल में पहली बार सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुल्लालम से मुलाकात ज़रूर की.

इससे ये संकेत भी मिलता है कि अमरीका ने इस क्षेत्र में अपनी विदेश नीति में कुछ अहम बदलाव किए हैं.

इस तरह कुल मिलाकर ईरान के प्रति मिलीजुली प्रतिक्रिया और सीरिया के साथ एक नई शुरूआत सम्मेलन का ख़ास आकर्षण रहे.

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