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इराक़ में हालात बेहद ख़राब:रिपोर्ट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ में पिछले दो महीने के दौरान ख़ासतौर से राजधानी बग़दाद में मानवाधिकार स्थिति में आई गिरावट की कड़ी आलोचना की है. अमरीकी सेना और इराक़ी सुरक्षा बलों ने हिंसा पर क़ाबू पाने के प्रयासों के तहत राजधानी बग़दाद में फ़रवरी में एक विशेष रणनीति के तहत बड़ा अभियान शुरू किया था जिसे नई सैन्य सुरक्षा योजना का नाम दिया गया था. इराक़ में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में देश में मानवाधिकार की स्थिति की बहुत ही ख़राब तस्वीर पेश की है और कहा है कि लगभग चालीस लाख लोग बेघर हो गए हैं और अन्य चालीस लाख लोग भुखमरी के कगार पर हैं. संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकार सुनिश्चित करने में नाकाम रहने पर इराक़ सरकार की आलोचना की है, ख़ासतौर से मध्य फ़रवरी में शुरू किए सैन्य अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर मारे गए छापों और लोगों की गिरफ़्तारी के मामलों में मानवाधिकारों का ख़याल नहीं रखा गया है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग तीन हज़ार लोगों को हिरासत में लिया गया है लेकिन उनके मानवाधिकारों की कोई गारंटी नहीं दी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, "लोगों को वारंट के बिना ही गिरफ़्तार किया जा रहा है और किसी व्यक्ति को कितने समय तक हिरासत में रखा जाएगा, इस बारे में कोई समय सीमा भी न ही तय की जा रही है और न ही इसका कोई ख़याल रखा जा रहा है." मुक़दमों की सुनवाई संयुक्त राष्ट्र ने न्याय व्यवस्था को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि कुछ ऐसे मामलों में तो मुक़दमों की सुनवाई सिर्फ़ कुछ ही मिनटों तक चली जिनमें उम्र क़ैद और यहाँ तक कि मौत की सज़ा सुनाई गई.
रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि इराक़ को अंतरराष्ट्रीय संधियों के लिए अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए वचनबद्ध है. इस रिपोर्ट में इराक़ में आम जीवन का बारीक़ी से जायज़ा लिया गया है जिसमें अनेक पहलुओं का ख़ाका खींचा गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनेक घटनाओं में इराक़ी सुरक्षा बलों और चरमपंथी गुटों के बीच किस तरहह से साँठगाँठ रही है और 2003 से विश्वविद्यालयों को निशाना बनाकर कम से कम 200 शिक्षाविदों और शिक्षा विशेषज्ञों को मार दिया गया है. रिपोर्ट का कहना है कि लगभग 12 हज़ार डॉक्टर इराक़ छोड़कर भाग चुके हैं लगभग 54 प्रतिशत इराक़ी सिर्फ़ एक डॉलर प्रतिदिन के ख़र्चे पर गुज़र-बसर करने को मजबूर हैं. रिपोर्ट के अनुसार इराक़ में महंगाई की दर 70 प्रतिशत तक पहुँच गई है. रिपोर्ट कहती है कि लगभग बीस लाख लोग इराक़ छोड़कर भाग चुकगे हैं और एक समय तो देश के अंदर ही लगभग 90 लाख लोग विस्थापित हो चुके थे. देश के भीतर ही कुछ प्रांतीय सरकारों ने अपने यहाँ शरणार्थियों के आने पर भी पांबदियाँ लगा दी हैं. संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि इराक़ ऐसा देश बनता जा रहा है जहाँ मानवीय त्रासदी की स्थिति दिन पर दिन और ख़राब होती जा रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें मलिकी ने दीवार बनाने का काम रोका23 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ी सुरक्षा के लिए नाज़ुक समय'23 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना सुन्नी नेता ने दीवार बनाने की निंदा की21 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना दो महीनों में सबसे हिंसक दिन, 180 मौतें18 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना इराक़ी शरणार्थी समस्या पर सम्मेलन17 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना सद्र गुट से जुड़े मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया16 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में धमाके, लगभग 50 की मौत14 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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