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शिया महिलाओं को तलाक़ का हक़ मिला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक नया मॉडल निकाहनामा पेश किया है जिसके बाद अब शिया समुदाय की महिलाओं को भी तलाक़ लेने का अधिकार होगा. यह फ़ैसला मुंबई में हुए ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सम्मेलन के दौरान लिया गया. साथ ही बोर्ड ने सरकार के सामने कुछ सिफ़ारिशें भी रखी हैं. इस नए निकाहनामे में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए ही कुछ नए प्रावधान हैं और महिलाओं को कई तरह से राहत दी गई है. निकाहनामे में कहा गया है कि जो महिलाएँ अपने पति से परेशान हैं और उनका पति उन्हें प्रताड़ित कर रहा है या उनसे लंबे अरसे से नहीं मिला है तो इस स्थिति में महिलाएँ तलाक़ ले सकती हैं. इसके साथ ही अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को तलाक देता है तो वैकल्पिक व्यवस्था होने तक तलाक़ देने वाला व्यक्ति उस महिला को गुज़ारा भत्ता देगा. नए निकाहनामे में कहा गया है कि निकाह के वक्त पाँच गवाहों की मौजूदगी ज़रूरी होगी. इसके मुताबिक अगर कोई महिला शादी से पहले नौकरी कर रही है और उस काम को शादी के बाद भी जारी रखना चाहती है तो उसे इसकी इजाज़त होगी. इस कमाई से वो अपने माता-पिता की मदद भी कर सकती है. कमज़ोर कड़ी हालांकि चिंता की बात यह है कि इस निकाहनामे में बाद में लिखा गया है कि दोनों ही पक्ष इन नए नियमों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं पर शिया बोर्ड के अध्यक्ष मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर ने कहा है कि वो उम्मीद करते हैं कि शिया युवा इन नए प्रावधानों को मानेंगे. उन्होंने बताया कि इस नए निकाहनामे में जो बातें कही गई हैं वो इराक़ में शिया समुदाय के सबसे बड़े इमाम सैयद अली हुसैनी सिस्तानी ने मंज़ूरी दे दी है.
ऑल इंडिया शिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का यह दूसरा वार्षिक सम्मेलन था. एक दिन के इस सम्मेलन में देशभर से कई वरिष्ठ उलेमाओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया. ग़ौरतलब है कि शिया समुदाय के नेताओं ने ख़ुद को ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड से अलग कर लिया था. इसके बाद जनवरी, 2005 में नए ऑल इंडिया शिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन किया गया. सरकार से गुहार बोर्ड ने नए मॉडल निकाहनामे के अलावा सरकार को एक प्रस्ताव भी पेश किया है जिसमें कहा गया है कि शिया समुदाय की बेहतरी के लिए सरकार को विशेष क़दम उठाने की ज़रूरत है. बोर्ड ने कहा कि इसके लिए शिया समुदाय को कुछ अधिकार अलग से दिए जाने चाहिए. बोर्ड ने चिंता जाहिर की कि भारत में शिया समुदाय के लोगों की आबादी क़रीब पाँच करोड़ है पर सरकार में उनका कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. बोर्ड ने मालेगांव की घटना का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि इस देश में मुस्लिम समुदाय के लोगों को ग़ैर-बराबरी की नज़र से देखा जा रहा है और वे ख़ुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें मॉडल निकाहनामे में सुधार की माँग31 मई, 2005 | भारत और पड़ोस 75 प्रतिशत तलाक़ महिलाओं की ओर से!08 मई, 2005 | भारत और पड़ोस मॉडल निकाहनामे में नया ख़ास नहीं01 मई, 2005 | भारत और पड़ोस आदर्श निकाहनामे को मंज़ूरी26 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस अब मियाँ-बीवी के हक़ निकाहनामे में09 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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