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रविवार, 01 मई, 2005 को 12:14 GMT तक के समाचार
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मॉडल निकाहनामे में नया ख़ास नहीं
बोर्ड की बैठक
मॉडल निकाहनामे को शरीयत के दायरे में ही रखा गया है
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चर्चित निकाहनामे को मंज़ूरी तो दे दी है लेकिन इसमें तलाक़ के विवादित प्रावधानों को नहीं बदला गया है.

यानी अभी भी एक साथ तीन बार 'तलाक़' कहकर शादी ख़त्म की जा सकेगी. चाहे वह ग़ुस्से में या किसी परिस्थिति विशेष में कही गई हो.

शनिवार को देर रात जिस मॉडल निकाहनामे को बोर्ड ने मंज़ूरी दी है उसमें दो महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं उनमें से एक है निकाह के वक्त दोनों पक्षों की ओर से एक घोषणा पत्र देने की अनिवार्यता और दूसरा कम उम्र में शादी के प्रावधान को हटाना.

हालांकि मुस्लिम समुदाय में परिवार नियोजन को लेकर बहस चल रही है लेकिन इस बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है.

मॉडल निकाहनामे को लेकर काफ़ी दिनों से बहस चल रही थी. प्रगतिशील दृष्टिकोण रखने वालों का कहना था कि तीन बार 'तलाक़' कहकर संबंध विच्छेद के प्रावधानों को ख़त्म किया जाना चाहिए.

लेकिन मॉडल निकाहनामे को मंज़री देते समय इस प्रावधान को बरकरार रखने की वकालत करते हुए कहा गया है कि शरीयत के प्रावधानों को नहीं बदला जा सकता.

हालांकि मेहर की रकम के बारे में कहा गया है कि मेहर की रकम शादी के वक़्त ही अदा कर देनी चाहिए और यदि वर पक्ष इसे तत्काल अदा करने की स्थिति में न हो तो इसे सोने-चाँदी की शक्ल में तय करना चाहिए जिससे कि रुपए के अवमूल्यन का इस पर कोई फ़र्क न पड़े.

सुधार

मॉडल निकाहनामे में जो सुधार किए गए हैं उनमें शादी के वक़्त दोनों पक्षों की ओर से एक हलफ़नामा देने की अनिवार्यता होगी.

 हमें नहीं लगता कि आबादी कोई समस्या है इसलिए इस पर चर्चा नहीं की गई है
बोर्ड के सचिव अब्दुल वहीद कुरैशी

इसमें दोनों पक्ष शादी के समय तय शर्तों का ज़िक्र करेंगे ताकि विवाद की स्थिति में इसके आधार पर बात हो सके.

इसके अलावा कहा गया है कि पति-पत्नी को चाहिए कि शादी में विवाद की स्थिति में तलाक़ का फ़ैसला ख़ुद लेने की बजाय काज़ी की अदालत में लेना चाहिए.

दूसरा एक फ़ैसला शादी की उम्र को लेकर किया गया है. पहले कहा गया था कि यदि लड़के-लड़की की उम्र कम हो तो माता पिता की अनुमति से शादी की जा सकती है.

लेकिन इन आरोपों के बाद कि इससे बाल विवाह को प्रश्रय मिल सकता है इस प्रावधान को ख़त्म कर दिया गया है.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिनों की बैठक में परिवार नियोजन जैसे मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है.

और इसके बारे में बोर्ड के सचिव अब्दुल वहीद कुरैशी ने कहा, "हमें नहीं लगता कि आबादी कोई समस्या है इसलिए इस पर चर्चा नहीं की गई है."

बोर्ड की बैठक रविवार को समाप्त हो गई.

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