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शुक्रवार, 25 मई, 2007 को 16:48 GMT तक के समाचार
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कई सीमाओं को तोड़कर बंधन जोड़ा

लोग कहते हैं कि इनका कोई निक़ाह नहीं हुआ
बिहार के एक गाँव में सिर्फ़ जाति-धर्म ही नहीं, कई और सीमाओं को लांघते हुए मोहम्मद सलीम ने 'निक़ाह' करके खलबली मचा दी है.

कई धार्मिक और क़ानूनी विशषज्ञों ने इस शादी को ग़ैर-इस्लामी और अवैध क़रार दिया है.

बैंड पार्टी चलाने वाले 27 वर्षीय सलीम का अपनी 'पत्नी' जयगोपाल से रिश्ते के बारे में कहना है कि, "हम एक दूसरे के बिन नहीं रह सकते थे इसलिए हमने यह फ़ैसला लिया है."

दुल्हन बनने वाले जयगोपाल कहते हैं, "हम तो पति-पत्नी के तौर पर पहले से ही रहते थे और अब हमने इसे न छिपाने का बीड़ा उठाया है."

बिहार के सारण ज़िले के गरखा प्रखंड के रशीदपुर गाँव के सलीम ने पिछले दिनों छपरा की सिविल अदालत में अपने वकील जंगबहादुर सिंह के साथ जाकर अपनी शादी के संबंध में शपथपत्र पेश किया.

 हम एक दूसरे के बिन नहीं रह सकते थे इसलिए हमने यह फ़ैसला लिया है
सलीम

इस शपथपत्र में कहा गया है कि सलीम और जयगोपाल ने 'निक़ाह' कर लिया है लेकिन गाँव के लोगों का कहना है कि कोई निक़ाह नहीं हुआ है.

जयगोपाल न सिर्फ़ किन्नर हैं बल्कि हिंदू भी हैं इसलिए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या निक़ाह के लिए उनका धर्मांतरण हुआ, इसका कोई स्पष्ट उत्तर भी यह दंपत्ति नहीं दे रहा.

सलीम का निक़ाह पहले ही संजीदा ख़ातून से हो चुका है और उनकी एक महीने की एक बेटी भी है.

सलीम और मालाकार ने शपथपत्र में कहा कि इस शादी के लिए पहली पत्नी संजीदा ने हामी भर दी है. हालांकि सलीम के एक रिश्तेदार के अनुसार इस समय संजीदा अपने मायके में हैं.

क़ानूनी उलझन

मोहम्मद सलीम के वकील जंगबहादुर सिंह ने विवाह को 'दो आत्माओं का मिलन' बताते हुए कहा है कि भारतीय क़ानून में ऐसी शादी पर किसी तरह की कोई रोक नहीं है.

 भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अनुसार समलैंगिक संबंध बनाने पर पाँच वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है इसलिए ऐसी शादी की इजाज़त नहीं दी जा सकती
नगेंद्र प्रसाद टीकावाला, वकील

दूसरी तरफ़, छपरा न्यायालय के पूर्व प्रभारी लोक अभियोजक और इस्लामी क़ानून के जानकार मोहर्रम अली ने कहा, "ऐसी शादी न तो हिंदू विवाह अधिनियम और न ही इस्लामी विवाह नियमों के मुताबिक़ ही मान्य है."

इसी न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता नागेंद्र प्रसाद टीकावाला कहते हैं, "भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अनुसार समलैंगिक संबंध बनाने पर पाँच वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है इसलिए ऐसी शादी की इजाज़त नहीं दी जा सकती."

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और बिहार के प्रतिष्ठित इस्लामी संगठन इमारत शरिया के महासचिव मौलाना अनीसुरर्हमान क़ासमी ने ऐसी शादी को ग़ैर-इस्लामी और ग़ैर-क़ानूनी क़रार देते हुए कहा कि ऐसी शादियों से समाज में बदअमनी फैलेगी.

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस्लामी संगठनों की तरफ़ से इसका विरोध किया जाएगा.

फ़िलहाल रशीदपुर गाँव के लोग इस निकाह पर चुटकी ले रहे हैं और यह उनके लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है लेकिन इस 'नवदंपत्ति' को डर है कि उन पर हमला हो सकता है.

जीना-मरना

26 वर्षीय जयगोपाल मालाकर बुनियादी तौर पर पश्चिम बंगाल से हैं और वह सलीम की बैंड पार्टी में महिलाओं के कपड़े पहनकर नाचते हैं, वे इस क्षेत्र में काफ़ी चर्चित हैं.

ख़ुद को महिला मानने वाले मालाकार का हावभाव औरतों जैसा है और गाने भी महिलाओं वाले गाती हैं.

 इन्हें अपना शौहर मान बना चुकी हूँ. अब तो जीना-मरना इन्ही के संग है
जयगोपाल, 'पत्नी'

मालाकार का कहना है, "इन्हें (पति का नाम लेना वह अनादर मानते हैं) अपना शौहर मान बना चुकी हूँ. अब तो जीना-मरना इन्ही के संग है."

वे सलीम की पहली पत्नी संजीदा को अपनी बड़ी बहन बताते हैं और शांति से अपना जीवन गुज़ारना चाहते हैं.

सलीम की चाची क़दीरन इस शादी से ख़ुश हैं. उनका कहना है कि वह मानती हैं कि जब दो दिल आपस में मिल रहे हैं तो इसमें लोगों को अडंगा नहीं लगाना चाहिए.

स्थानीय लोगों में इस शादी के काफ़ी चर्चे हैं. लोगों का मानना है कि शादी के इस मौसम में सलीम-मालाकार के इस ऐलान से उनकी बैंड पार्टी की माँग में ज़बरदस्त इजाफ़ा होगा और उनकी कमाई बढ़ सकती है.

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