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गुरुवार, 02 जून, 2005 को 13:36 GMT तक के समाचार
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एक पाकिस्तानी समलैंगिक की दास्ताँ
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पाकिस्तान में समलैंगिकों की इस तरह खुलेआम परेड की बात सोची भी नहीं जा सकती
पूरे दक्षिण एशिया में ही समलैंगिकता के मुद्दे पर कोई बात तक नहीं करना चाहता लेकिन अब कुछ जगहों पर समलैंगिक खुलकर सामने आने लगे हैं.

सुनिए एक पाकिस्तानी समलैंगिक की कहानी - उन्हीं की ज़ुबानी (वह अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं) कि किसी पश्चिमी समाज के तुलना में पाकिस्तान के समलैंगिकों की स्थिति किस तरह से बेहतर है:

दक्षिण एशिया में यौन पहचान छुपाने की बाध्यता और समलैंगिकों के उत्पीड़न की बात आम है लेकिन हर चीज़ में अपवाद होते हैं.

मैं ऐसा ही एक अपवाद हूँ. मैं पाकिस्तान में पैदा हुआ और मुझे अपनी विशिष्ट लैंगिकता का अहसास अमरीका में पढ़ाई के दौरान हुआ. अमरीका में ही मुझे प्यार और सेक्स का भी पहला अनुभव हुआ, लेकिन मैंने पाकिस्तान वापस लौटने का फ़ैसला किया.

हो सकता है लोगों को यह सुनकर आश्चर्य हो कि मुझे पाकिस्तान में पश्चिमी समाज के मुक़ाबले कम समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

हालाँकि शुरू में ऐसी बेफिक्री नहीं थी. जब मैं पाकिस्तान वापस लौटा तो मेरे भाई, जो समलैंगिक नहीं है, ने कहा कि मुझे अपनी लैंगिकता को लेकर घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. मुझे लगा कि वह हक़ीक़त से दूर है.

लेकिन अब लगता है कि वह ठीक ही कह रहा था. मैं यूँ तो कई मामलों में अब भी समलैंगिक होने की बात सार्वजनिक करने से बचता हूँ, परिवार के अधिकतर लोगों को मैंने अपनी स्थिति बता दी है. हमें उनका प्यार भरा समर्थन मिल रहा है.

मैंने दोस्तों को भी अपने समलैंगिक होने की बात बता दी है और ऐसा कभी-कभार ही हुआ जब समलैंगिकों को ग़लत मानने वाले लोगों से मेरा पाला पड़ा.

मैं एक प्रेमी के साथ रहता हूँ और किसी को इस पर कोई आपत्ति नहीं है और यहाँ की समलैंगिक पार्टियाँ विदेश में होने वाली पार्टियों से कहीं बढ़कर होती हैं.

कोई परेशानी नहीं

सच कहूँ तो पिछले 10 साल में शायद की कभी ऐसा मौक़ा आया जब समलैंगिक होने के कारण पाकिस्तान में मुझे दुश्वारियों का सामना करना पड़ा हो.

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पाकिस्तान का समाज बहुत ही परंपरावादी है

वैसे मैं ये भी नहीं कहूँगा कि पाकिस्तान में एक समलैंगिक के रूप में रहना आसान है. समलैंगिता यहाँ ग़ैरक़ानूनी है. साथ ही समलैंगिकों में से अनेक लोग धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं को देखते हुए खुलेआम अपनी समलैंगिता की घोषणा करने से भी डरते हैं.

परिजनों से बहिष्कार का भय भी होता है.

एक तरह से कहें तो पाकिस्तानी समाज में अमरीकी सेना की सोच लेकर चलते हैं- पूछो नहीं, बताओ नहीं. इस समाज में आप समलैंगिक हैं या नहीं, समलैंगिकता का ज़रूरत से ज़्यादा प्रदर्शन स्वीकार नहीं किया जाता.

कई मामलों में, मसलन शारीरिक संबंधों की बात, विपरित-लिंगी प्रेमी युगलों को ज़्यादा दुश्वारियाँ झेलनी पड़ती है.

वैसे सूचना तकनीक के निरंतर प्रचार-प्रसार से स्थिति बदलने की उम्मीदें बढ़ी है.

इंटरनेट, सैटेलाइट टेलीविज़न और फ़िल्मों ने नई पीढ़ी के समलैंगिकों को नई पहचान और अभिव्यक्ति के नए माध्यम दिए हैं. और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि मेरी अपने ब्वॉयफ़्रेंड से मुलाक़ात इंटरनेट के ज़रिए ही हुई.

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