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समलैंगिकता के सवाल पर चर्चों में फूट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के एंग्लिकन चर्च ने अमरीका और कनाडा की अपनी शाखाओं से कहा है कि वे ईसाइयों की एक प्रमुख परिषद से अस्थाई तौर पर अलग हो जाएँ. उत्तरी आयरलैंड में शुक्रवार को समाप्त हुई चार दिन की बैठक के बाद एंग्लिकन चर्च ने समलैंगिकता के सवाल पर इस परिषद के रवैए के विरोध में यह फ़ैसला किया. एंग्लिकन चर्च का कहना है कि अमरीका और कनाडा के चर्चों को "ईसाई समाज में अपने स्थान के बारे में सोचना चाहिए." यह विवाद 2003 से ही चल रहा है जबकि अमरीकी चर्च ने एक समलैंगिक बिशप का समर्थन किया और कनाडा में तो समलैंगिक विवाहों में पादरी आशीर्वाद भी देने लगे. एंग्लिकन कंसल्टेटिव काउंसिल से अलग होने के ब्रितानी चर्च के फ़ैसले को कुछ लोग चर्चों के बीच विभाजन के पहले क़दम के रूप में भी देख रहे हैं. यह विवाद उदारवादी और कट्टरपंथी ईसाई नेताओं के बीच एक तीखी बहस का केंद्र बन गया है. ब्रितानी चर्च ने अपने निर्णय की जानकारी देते हुए एक पत्र में लिखा है, "शीर्ष धर्माधिकारी इस बात से बहुत चिंतित हैं कि सेक्स के बारे में ईसाइयत की शिक्षा को अमरीका और कनाडा के चर्चों ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया है." विश्व एंग्लिकन चर्च के प्रमुख आर्चबिशप ऑफ़ कैंटरबरी रोवन विलियम्स ने कहा है कि इस निर्णय के बाद सभी के लिए यह सोचने का अवसर होगा कि वे किस दिशा में जाना चाहते हैं. कई परंपरावादी चर्चों ने एंग्लिकन चर्च के इस फ़ैसले का स्वागत किया है, बताया जाता है कि नाइजीरिया के चर्च के प्रमुख पादरी पीटर अकिनोला ने तो इस निर्णय की ख़ुशी में दावत दी है. उन्होंने कहा, "जब हमारे परिवार में कोई बच्चा शरारत करता है तो उसे समझाना बड़ों का दायित्व होता है कि वह ग़लत काम कर रहा है." एंग्लिकन चर्च के नेताओं ने माँग की है कि जून महीने में एक विशेष सत्र का आयोजन होना चाहिए जिसमें अमरीका और कनाडा के चर्चों को सेक्स के बारे में अपनी राय सामने रखनी चाहिए. |
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