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भारतीय समलैंगिक क़ानून की आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर भारतीय शहर लखनऊ में चार समलैंगिकों की गिरफ़्तारी के बाद मानवाधिकार संगठनों ने समलैंगिकों पर क़ानून की कड़ी आलोचना की है. इन संगठनों का कहना है कि इस क़ानून से मानवाधिकार पर ख़तरा पैदा हो गया है और इससे एड्स फैलने को बढ़ावा मिलता है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिकनिक मना रहे चार समलैंगिक लोगों को गिरफ़्तार किया है. जिसके बाद विरोध के स्वर उठने लगे हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच ने लखनऊ पुलिस पर समलैंगिकों के साथ 'शर्मनाक' व्यवहार करने का भी आरोप लगाया है. अभी तक लखनऊ पुलिस की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. संगठन का कहना है कि उसे जो रिपोर्ट मिली है, उसके मुताबिक़ इन समलैंगिकों को स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से फँसाया गया. आरोप ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पिछले सप्ताह लखनऊ में पुलिस अधिकारियों ने ख़ुद को एक बेवसाइट पर समलैंगिक के रूप में पेश किया और एक व्यक्ति को अपने जाल में फँसाया. उसके बाद उस व्यक्ति को मजबूर किया गया कि वह अन्य व्यक्तियों को बुलाए और बाद में सभी को गिरफ़्तार कर लिया गया. ह्यूमन राइट्स वॉच में समलैंगिकों के अधिकार कार्यक्रम के निदेशक स्कॉट लॉन्ग ने कहा, "समलैंगिकों और इनसे जुड़े ग़ैर सरकारी संगठनों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में लखनऊ पुलिस का शर्मनाक रिकॉर्ड है." लॉन्ग ने कहा कि पुलिस ऐसा इसलिए कर पाती है क्योंकि भारत सरकार समलैंगिक व्यवहार को अपराध मानती है और इसी कारण कई लोग एचआईवी/एड्स की जाँच के लिए सामने नहीं आते हैं. भारत में समलैंगिकों के बीच यौन संबंध को अप्राकृतिक माना जाता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है और इस मामले में 10 साल तक क़ैद की सज़ा भी हो सकती है. हाल ही में एक सरकारी आयोग ने एड्स से लड़ने के लिए समलैंगिकता को क़ानूनी बनाने की सिफ़ारिश की थी. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ भारत में एड्स/एचआईवी से पीड़ित लोगों की संख्या 50 लाख से भी ज़्यादा है. | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान में 'पहला समलैंगिक विवाह'05 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाली समलैंगिकों को एल्टन जॉन की मदद05 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस उषा और शिल्पी के प्रेम की लड़ाई07 जून, 2005 | भारत और पड़ोस एक पाकिस्तानी समलैंगिक की दास्ताँ02 जून, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में समलैंगिकों का पहला अख़बार21 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस 'साथ जी नहीं सकते, मर तो सकते हैं'15 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस समलैंगिकता संबंधी याचिका ख़ारिज02 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ में रह रही हैं कई 'गर्लफ़्रेंड'24 जून, 2004 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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