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छत्तीसगढ़ में रह रही हैं कई 'गर्लफ़्रेंड' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ओर तो महिला समलैंगिकों की फ़िल्म को लेकर हंगामा मचा हुआ है और दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ जैसे छोटे से राज्य में कई समलैंगिक जोड़ियाँ मज़े में जी रही हैं. हालांकि उनको क़ानूनी मान्यता अभी नहीं मिली है लेकिन इससे उनके जीवन पर फ़र्क पड़ भी नहीं रहा है, उनका दावा है कि वे सुखी हैं. अंबिकापुर के ज़िला अस्पताल की नर्स तनूजा चौहान की मुलाक़ात जया वर्मा से अस्पताल में हुई. दोनों में दोस्ती हुई फिर बात यहाँ तक जा पहुँची कि उन्होंने आपस में शादी करने का फ़ैसला कर लिया. दोनों के पास इसके अपने-अपने कारण थे. तनूजा जब बहुत छोटी थी तभी माता-पिता दोनों में तलाक़ हो गया. इसके बाद उसे अपने पिता से नफ़रत हो गई और पता नहीं कब वह पूरी पुरुष जाति से नफ़रत में बदल गई. दूसरी ओर, जया वर्मा की छोटी बहन के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. इसके बाद से उसे भी पुरुषों से विरक्ति सी हो गई थी.
27 मार्च 2001 को दोनों ने वैदिक रीति से विवाह किया. पंडित जी के सामने 35 वर्षीय तनूजा ने पति के रुप में और 25 वर्षीय जया ने पत्नी के रुप में सात फेरे लिए. बाक़ायदा दावत हुई जिसमें सैकड़ों लोगों ने 'वर-वधू' को आशीर्वाद दिया. हालाँकि अंबिकापुर के विवाह पंजीयक ने उनकी शादी का प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया लेकिन समलैंगिक संबंधों को अप्राकृतिक यौनाचार की संज्ञा देने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत दोनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. दोनों की नर्स की नौकरी भी बरक़रार रही. तनूजा ने तो अपना नाम बदलकर समीर सिंह चौहान रख लिया है लेकिन उन्हें पुरुषों की तरह कपड़े पहनने की इज़ाज़त नहीं मिली. वे कहती हैं, "इस मामले को मैंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के सामने भी रखा लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ." वह दफ़्तर के अलावा शेष जगह पुरुषों की तरह के ही कपड़े पहनती हैं. क्या फ़र्क पड़ता है
वे तो बाक़ायदा अपना वंश आगे चलाना चाहती हैं और इसके लिए वे एक बच्चा गोद लेना चाहती हैं. ज़ाहिर है कि वे एक लड़की को ही गोद लेंगे. अंजनी कहती हैं, "मैं नीरा के बिना नहीं रह सकती और उससे मैंने दोस्ती कर ली तो क्या ग़लत किया." बस्तर में भी कुछ अर्सा पहले दो लड़कियों ने विवाहित दंपत्ति के रुप में साथ रहना शुरु किया है. लेकिन वे किसी भी सूरत में इस पर बात करने को तैयार नहीं हुईं. लेकिन... लेकिन जन्म-जन्म साथ रहने का वादा करने वाली रासमति और रुक्मणी का साथ बहुत नहीं रह सका. रायगढ़ से 40 किलोमीटर दूर एक गाँव में रहने वाली 20 साल की रासमति और 13 साल की रुक्मणी ने एक मंदिर में शादी कर ली लेकिन जब वे गाँव पहुँची तो हंगामा मच गया. गाँववालों ने तय किया कि दोनों को मिलने न दिया जाए. नाबालिग़ रुक्मणी की शादी एक युवक से करा दी गई लेकिन समलैंगिक विवाद के चलते युवक ने उसे तलाक़ दे दिया. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की संस्था 'फ़ोरम फ़ॉर फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग एंड डॉक्युमेंटेशन एंड एडवोकेसी' के सुभाष महापात्रा इन समलैंगिक शादियों को मान्यता दिलाने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. वे कहते हैं, "संविधान ने हर भारतीय नागरिक को जो अधिकार दिए हैं, समलैंगिक विवाह को उसी दायरे में लाना होगा." |
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